Home » Archives » व्यंग्य विशेषांक - मार्च-अप्रैल 2026

व्यंग्य विशेषांक - मार्च-अप्रैल 2026

Released: February 1960

इस अंक की कुल रचनाएँ : 82

भारत-दर्शन (मार्च-अप्रैल 2026): व्यंग्य विशेषांक : कहानियाँ, कविताएँ, लोक-कथाएँ, व्यंग्य-कथा और आलेख। Explore Hindi Literature, Short Stories & Folklore in this issue of Bharat-Darshan Web Magazine.

इस अंक के बारे में विस्तृत जानकारी पढ़ें [ i ]

भारत-दर्शन का यह विशेष व्यंग्य अंक पाठकों के लिए हास्य, व्यंग्य, कहानी, कविता और लोक-कथाओं का एक समृद्ध संकलन प्रस्तुत करता है। हिंदी साहित्य के अनेक प्रतिष्ठित और समकालीन रचनाकारों की रचनाएँ इसमें शामिल हैं, जो सामाजिक विसंगतियों, मानवीय व्यवहार और बदलते समय पर तीक्ष्ण तथा मनोरंजक टिप्पणी करती हैं।

हास्य-व्यंग्य और व्यंग्य रचनाओं में शरद जोशी की 'जिसके हम मामा हैं' और 'शरद के वनलाइनर', हरिशंकर परसाई की 'विकलांग श्रद्धा का दौर', गोपाल प्रसाद व्यास की 'व्यंग्य पर व्यंग्य', कृष्ण चंदर की 'मेरा मन-पसंद सफ़्हा' तथा लतीफ़ घोंघी की 'अध्यक्षता की बीमारी' शामिल हैं।

इसी क्रम में बालेन्दु शेखर तिवारी की 'होली-2088', दुर्गाशंकर त्रिवेदी की 'सबसे बड़ी शोक कथा', केशवचन्द्र वर्मा की 'स्वास्थ्य और आराम' तथा ईश्वर शर्मा की 'जागते रहो' भी सम्मिलित हैं।

भारतेंदु हरिश्चंद्र का परिहसन 'अंगहीन धनी' तथा दिविक रमेश का समीक्षात्मक लेख 'कविता में व्यंग्य या व्यंग्य कविता' भी इस अंक को समृद्ध करते हैं।

समकालीन व्यंग्य लेखों में धर्मपाल महेंद्र जैन की 'इंडियन पपेट शो', वीणा सिन्हा की 'कुर्सी का लोकतंत्र', शशिकांत सिंह की 'धर्मपत्नी को शादी की सालगिरह मुबारकबाद', डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' की 'औकात मापन कार्यालय', शांतिलाल जैन की 'वेस्ट नहीं, इन्वेस्टमेंट समझे जाने की जरूरत' तथा रेखा शाह की 'लिफाफे में रसगुल्ला' जैसी रचनाएँ उल्लेखनीय हैं।

रणविजय राव की 'नशे में कौन नहीं है', रामकिशोर उपाध्याय की 'धर्म के काम में लक्ष्मी जी की कृपा', राजेन्द्र मोहन शर्मा की 'विषय ही विषयी संसार का सार है', परवेश जैन की 'आलू : एक दारुण कथा' तथा डॉ. पी.एस. ढींगड़ा की 'चाय खत्म हो गई थी' भी शामिल हैं।

नील मणि के 'कार्टून' तथा 'कुछ वन लाइनर' भी पाठकों को मुस्कराने पर विवश करेंगे।

अन्य व्यंग्य रचनाओं में मुक्ति नाथ मिश्र की 'ध्वनि प्रदूषण का सांस्कृतिक कार्यक्रम', अरविंद पथिक की 'मोई है तो मुमकिन है', जसविंदर सिंह 'रूपल' की 'जब भगवान मेरे बिस्तर से उठकर चले गए…', डॉ. सुरेन्द्र सिंह रावत की 'तेरहवीं', आशीष दशोत्तर की 'साँप पालो तो ऐसे' और आत्माराम भाटी की 'धमकी की धौंस' सम्मिलित हैं।

इसके अतिरिक्त अरविंद तिवारी की ''पोल खुल गई' वाला मौसम', लालित्य ललित की 'कलसी और चुप्पी प्रसाद का गठबंधन', मुकेश राठौर की 'दो शब्दों से उपजा शोक', दिलीप कुमार की 'इंटरनेशनल स्कूल' तथा सन्तोष कुमार झा की 'राजभाषा पखवाड़ा और मैं' भी प्रकाशित हैं।

विवेक रंजन श्रीवास्तव की 'सानू की — सभ्यता का नया राग', डॉ. मुकेश असीमित की 'चलो बुलावा आया है', दविंदर सिंह गिल की 'फेसबुक और सोने का अंडा देने वाली मुर्गी', अनिल चाड़क की 'दिल की कहानी उसकी जुबानी', बी.एल. आच्छा की 'मैं पसंद हूं किसी और की, मुझे हांकता कोई और है' तथा प्रेम जनमेजय की 'बर्फ का पानी' भी इस अंक का हिस्सा हैं।

सूर्यबाला की 'चन्द पूर्वजन्मों का लेखा-जोखा' और ज्ञान चतुर्वेदी की 'अपने अपने बाड़े' जैसी चर्चित व्यंग्य रचनाएँ भी शामिल हैं।

कहानी खंड में वृंदावनलाल वर्मा की कहानी 'भीमसेन के लट्ठ' तथा प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'मोटेराम जी शास्त्री' जैसी उल्लेखनीय रचनाएँ पाठकों को आकर्षित करेंगी।

लघुकथा खंड में सआदत हसन मंटो की 'पेश-बंदी' तथा रोहित कुमार 'हैप्पी' की 'दोराहा' प्रकाशित की गई हैं।

काव्य खंड में कबीर की 'व्यंग्यात्मक साखियां और पद', भारतेंदु हरिश्चंद्र की 'मुकरियाँ', 'बेढब' बनारसी की 'बेढब दोहावली', रमानाथ अवस्थी की 'होली में', गंगाप्रसाद पाण्डेय की 'उलाहना' तथा विनोद शर्मा की 'निराला के प्रति' जैसी रचनाएँ सम्मिलित हैं।

इसी खंड में अज्ञेय की प्रसिद्ध कविता 'साँप', नागार्जुन की 'शासन की बंदूक', दुष्यंत कुमार की 'दो ग़ज़लें', काका हाथरसी के 'हास्य-व्यंग्य दोहे', रघुवीर सहाय की 'रामदास', धूमिल की 'मोचीराम', ओम प्रकाश 'आदित्य' की 'इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं', पं० हरिशंकर शर्मा की 'हवाई कवि-सम्मेलन', मधुप पांडेय की 'विचित्र विवशता', अरुण जैमिनी की 'हिन्दी-हत्या' तथा प्रदीप चौबे की 'इस शहर की सभ्यता हद है' प्रस्तुत हैं।

राजेश्वर वशिष्ठ की कविता 'प्रजातंत्र में कबूतर', डॉ वंदना मुकेश की 'मकान और लड़के-लड़कियाँ'  और आराधना झा श्रीवास्तव की 'कविता और पाठक' पढ़िए। 

इनके अतिरिक्त अमरजीत कसक की कविता 'गणतंत्र',  गगन संधू की 'गाँव से मॉल तक का सफ़र', प्रीति ढींगरा की 'ट्रैफिक जाम का पुराण', रमिंदर रम्मी की 'शायद मैं एक बुरी औरत हूँ', सफ़िया हयात की 'दूसरा रूप',  डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा ‘अदिति’ की 'तू स्वामिनी मैं चेरी', तरिंदर कौर की 'दीवाली',  डॉ उपासना दीक्षित की दो कविताएं सम्मिलित हैं।    

बाल-साहित्य में 'सबसे सुंदर बच्चा' (अकबर-बीरबल कथा), 'शेख चिल्ली और अंडों की टोकरी' तथा विष्णु शर्मा की पंचतंत्र कथा 'सिंह को जीवित करने वाले' जैसी रोचक कथाएँ भी सम्मिलित हैं।

लोककथा में 'लोभी दर्जी और चतुर मेहमान' प्रस्तुत है।

अंत में राजेश कुमार का अतिथि संपादकीय 'भारत दर्शन का व्यंग्य विशेषांक — एक मीठी चुभन, एक कड़वा अट्टहास' इस विशेषांक को सार्थक बनाता है।

सबसे सुंदर बच्चा
बाल-साहित्य — अकबर बीरबल के किस्से
दोराहा | लघुकथा
विविध — रोहित कुमार 'हैप्पी'
पेश-बंदी | लघुकथा
विविध — सआदत हसन मंटो
व्यंग्य पर व्यंग्य
विविध — गोपाल प्रसाद व्यास
भीमसेन के लट्ठ | कहानी
विविध — वृंदावनलाल वर्मा
होली-2088 | हास्य-व्यंग्य
विविध — बालेन्दु शेखर तिवारी
सबसे बड़ी शोक कथा | सुनी-सुनायी
विविध — दुर्गाशंकर त्रिवेदी
भवानीप्रसाद मिश्र के वनलाइनर
विविध — भवानीप्रसाद मिश्र
स्वास्थ्य और आराम | हास्य-व्यंग्य
विविध — केशवचन्द्र वर्मा
जागते रहो | व्यंग्य
विविध — ईश्वर शर्मा
शरद के वनलाइर
विविध — शरद जोशी
विकलांग श्रद्धा का दौर | व्यंग्य
विविध — हरिशंकर परसाई
अंगहीन धनी | परिहसन
विविध — भारतेंदु हरिश्चंद्र
इंडियन पपेट शो | व्यंग्य
विविध — धर्मपाल महेंद्र जैन
कुर्सी का लोकतंत्र | व्यंग्य
विविध — वीणा सिन्हा 
औकात मापन कार्यालय | व्यंग्य
विविध — डॉ सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'
विषय ही विषयी संसार का सार है | व्यंग्य 
विविध — राजेन्द्र मोहन शर्मा 
आलू : एक दारुण कथा | व्यंग्य
विविध — परवेश जैन 
चाय खत्म हो गई थी | व्यंग्य
विविध — डॉ पी एस ढींगड़ा
कार्टून
विविध — नील मणि
कुछ वन लाइनर 
विविध — नील मणि
मोई है तो मुमकिन है | व्यंग्य 
विविध — अरविंद पथिक 
जब भगवान मेरे बिस्तर से उठकर चले गए…
विविध — जसविंदर सिंह “रूपल”
तेरहवीं | व्यंग्य
विविध — डॉ. सुरेन्द्र सिंह रावत
सांप पालो तो ऐसे | व्यंग्य
विविध — आशीष दशोत्तर
धमकी की धौंस
विविध — आत्माराम भाटी
 'पोल खुल गई' वाला मौसम | व्यंग्य
विविध — अरविंद तिवारी
इंटरनेशनल स्कूल | व्यंग्य
विविध — दिलीप कुमार
राजभाषा पखवाड़ा और मैं | व्यंग्य
विविध — सन्तोष कुमार झा
सानू की — सभ्यता का नया राग
विविध — विवेक रंजन श्रीवास्तव 
चलो बुलावा आया है | व्यंग्य
विविध — डॉ मुकेश असीमित
बर्फ का पानी | व्यंग्य
विविध — प्रेम जनमेजय
मुकरियाँ 
काव्य — भारतेंदु हरिश्चंद्र
बेढब दोहावली 
काव्य — 'बेढब' बनारसी
होली में
काव्य — रमानाथ अवस्थी
उलाहना
काव्य — गंगाप्रसाद पाण्डेय
साँप | अज्ञेय की प्रसिद्ध लघु कविता
काव्य — सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
शासन की बंदूक 
काव्य — नागार्जुन
दो ग़ज़लें
काव्य — दुष्यंत कुमार
हास्य-व्यंग्य दोहे
काव्य — काका हाथरसी
रामदास | कविता
काव्य — रघुवीर सहाय
मोचीराम | कविता
काव्य — धूमिल
हवाई कवि-सम्मेलन | हास्य-व्यंग्य
काव्य — पं० हरिशंकर शर्मा
विचित्र विवशता | कविता
काव्य — मधुप पांडेय
हिन्दी-हत्या | व्यंग्य कविता
काव्य — अरुण जैमिनी
इस शहर की सभ्यता हद है | हज़ल
काव्य — प्रदीप चौबे
लोभी दर्जी और चतुर मेहमान | लोक-कथा
कथा-कहानियाँ — भारत-दर्शन संकलन
शेख चिल्ली और अंडों की टोकरी
बाल-साहित्य — भारत-दर्शन संकलन
सिंह को जीवित करने वाले | पंचतंत्र
बाल-साहित्य — विष्णु शर्मा
अपने अपने बाड़े | व्यंग्य
विविध — ज्ञान चतुर्वेदी
प्रजातंत्र में कबूतर
काव्य — राजेश्वर वशिष्ठ | कविता
मकान और लड़के-लड़कियाँ | कविता
काव्य — डॉ वंदना मुकेश 
डॉ उपासना दीक्षित की दो कविताएं
काव्य — डॉ उपासना दीक्षित
कविता और पाठक | कविता
काव्य — आराधना झा श्रीवास्तव
दीवाली | कविता
काव्य — तरिंदर कौर
तू स्वामिनी मैं चेरी | कविता
काव्य — डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा ‘अदिति’ 
दूसरा रूप | कविता
काव्य — सफ़िया हयात
शायद मैं एक बुरी औरत हूँ | कविता
काव्य — रमिंदर रम्मी
ट्रैफिक जाम का पुराण
काव्य — प्रीति ढींगरा
गाँव से मॉल तक का सफ़र
काव्य — संधू गगन
गणतंत्र
काव्य — अमरजीत कसक