जुलाई-अगस्त 2026
इस अंक की कुल रचनाएँ : 39
भारत-दर्शन के 'जुलाई-अगस्त' अंक में कहानियाँ, कविताएँ, लोक-कथाएँ, व्यंग्य और आलेख प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं। बाल-साहित्य व आलेख भी पठनीय हैं। Explore Hindi Literature, Stories, Short Stories & Folklore in this issue of Bharat-Darshan.
भारत-दर्शन का जुलाई-अगस्त 2026 अंक आपकी सेवा में सादर भेंट है।
इस अंक में हमने विविध साहित्य और सांस्कृतिक रंगों को प्रमुखता दी है। यह अंक पाठकों के लिए काव्य, कथा-कहानियाँ और ज्ञानवर्धक विविध रचनाओं का एक अनूठा गुलदस्ता प्रस्तुत करता है। इस अंक में हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित और समकालीन रचनाकारों की रचनाएँ शामिल हैं, जो जीवन के विविध पक्षों को उजागर करती हैं।
कथा-कहानियाँ खंड में सुब्रह्मण्य भारती की अर्जुन का संदेह, स्वदेश दीपक की तमाशा, तथा शिवानी की लाल हवेली जैसी उत्कृष्ट कहानियाँ प्रकाशित की गई हैं।
लघुकथाओं में सुनील शर्मा की लघुकथा 'नाला', टीकम चन्दर ढोडरिया की 'बूढ़ा बरगद', आनन्द मोहन अवस्थी की 'दो आदमी', सम्यक मिश्र की 'नारी सशक्तीकरण' पढ़ें।
काव्य खंड में कविताओं के अंतर्गत धर्मवीर भारती की उत्तर नहीं हूँ, मैथिलीशरण गुप्त की उत्तर प्रदेश के प्रति, श्रीकृष्ण सरल की कहो नहीं करके दिखलाओ, तथा केदारनाथ सिंह की कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए, कमला प्रसाद मिश्र की क्या मैं परदेसी हूँ ?, नरेंद्र शर्मा की ग्राम चित्र, अब्बास रज़ा अल्वी की छोटी सी बिगड़ी बात को, नागार्जुन की तेरे दरबार में क्या चलता है, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी की दहशत, भगवतीचरण वर्मा की देखो, सोचो, समझो, सुदामा पांडेय धूमिल की धूमिल की अंतिम कविता, भवानी प्रसाद मिश्र की प्राण रहते रचनाएँ पाठकों को पसंद आएंगी।
रैदास की साखियाँ, और निज़ाम फतेहपुरी के दोहे इस अंक को और समृद्ध करते हैं।
कविताओं के इसी क्रम में नील मणि की कविता 'अधूरी बातों की चुभन', अमलेन्दु अस्थाना की 'बॉस का बॉसनामा', तथा क्षेत्रपाल शर्मा के 'मुक्तक' भी सम्मिलित हैं। डॉ. सुमन सुरभि की देशभक्ति से परिपूर्ण कविता, 'अमर शहीदों को नमन' पठनीय है।
ग़ज़लों में आज़ादी के दीवानों की प्रिय, जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’ की चर्चित ग़ज़ल, 'शहीदों की चिताओं पर' तथा शमशेर बहादुर सिंह की ग़ज़ल 'मैं आपसे कहने को ही था' पढ़ें।
आनन्द विश्वास के हाइकु पढ़ें।
गीतों में गोपालदास ‘नीरज’ का गीत मुझे न करना याद, तुम्हारा आँगन गीला हो जायेगा, श्रवण राही की हिचकियाँ कह गईं... तथा रेखा राजवंशी का तेरे नाम सम्मिलित किया है।
हास्य काव्य में इस बार काका हाथरसी की दो हास्य कविताएं पढ़ें।
पढ़िए, जगन्नाथ प्रसाद चौबे वनमाली का व्यंग्य 'जनता की सरकार'।
आलेखों में पं० बाल गंगाधर तिलक, पुरुषोत्तम दास टंडन तथा डॉ. मनुप्रताप की रचना विश्व शान्ति की शिक्षा: भगवान बुद्ध के सन्दर्भ में पढ़ें।