जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।
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भारत-दर्शन : हिंदी कहानियाँ, कविताएं और साहित्य (Hindi Stories, Poetry & Literature)

न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित 'भारत-दर्शन' मे आपका स्वागत है। यहाँ आप साहित्य संकलन और भारत-दर्शन द्वै-मासिक पत्रिका के अतिरिक्त हिंदी के अनेक संसाधनों से लाभान्वित हो सकते हैं।

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व्यंग्य का महायज्ञ -  मार्च-अप्रैल 2026 Cover
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भारत-दर्शन पत्रिका

(व्यंग्य का महायज्ञ - मार्च-अप्रैल 2026)

भारत-दर्शन का यह व्यंग्य का महायज्ञ (व्यंग्य विशेषांक) पाठकों के लिए हास्य, व्यंग्य, कहानी, कविता और लोक-कथाओं का एक समृद्ध संकलन प्रस्तुत करता है। हिंदी साहित्य के अनेक प्रतिष्ठित और समकालीन रचनाकारों की रचनाएँ इसमें शामिल हैं, जो सामाजिक विसंगतियों, मानवीय व्यवहार और बदलते समय पर तीक्ष्ण तथा मनोरंजक टिप्पणी करती हैं।

हास्य-व्यंग्य और व्यंग्य रचनाओं में हरिशंकर परसाई की 'विकलांग श्रद्धा का दौर', शरद जोशी की 'जिसके हम मामा हैं' और 'शरद के वनलाइनर', गोपाल प्रसाद व्यास की 'व्यंग्य पर व्यंग्य', कृष्ण चंदर की 'मेरा मन-पसंद सफ़्हा' तथा लतीफ़ घोंघी की 'अध्यक्षता की बीमारी' शामिल हैं।

इसी क्रम में बालेन्दु शेखर तिवारी की 'होली-2088', दुर्गाशंकर त्रिवेदी की 'सबसे बड़ी शोक कथा', केशवचन्द्र वर्मा की 'स्वास्थ्य और आराम' तथा ईश्वर शर्मा की 'जागते रहो' भी सम्मिलित हैं।

भारतेंदु हरिश्चंद्र का प्रहसन 'अंगहीन धनी' तथा दिविक रमेश का समीक्षात्मक लेख 'कविता में व्यंग्य या व्यंग्य कविता' भी इस अंक को समृद्ध करते हैं।

समकालीन व्यंग्यों प्रेम जनमेजय की 'बर्फ का पानी', सूर्यबाला की 'चन्द पूर्वजन्मों का लेखा-जोखा', ज्ञान चतुर्वेदी की 'अपने अपने बाड़े' और धर्मपाल महेंद्र जैन की 'इंडियन पपेट शो' जैसी चर्चित व्यंग्य रचनाएँ शामिल हैं। 

मल्टिमीडिया में शरद जोशी का व्यंग्य 'है भी मगर नहीं है'--प्रभात गोस्वामी की आवाज़ में, और  चर्चित व्यंग्यकार एवं समीक्षक 'डॉ पिलकेन्द्र अरोरा का वीडियो' देखें। 

रणविजय राव की 'नशे में कौन नहीं है', रामकिशोर उपाध्याय की 'धर्म के काम में लक्ष्मी जी की कृपा', राजेन्द्र मोहन शर्मा की 'विषय ही विषयी संसार का सार है', परवेश जैन की 'आलू : एक दारुण कथा' तथा डॉ. पी.एस. ढींगड़ा की 'चाय खत्म हो गई थी' पठनीय व्यंग्य हैं।

नील मणि के 'कार्टून' तथा 'कुछ वन लाइनर' भी पाठकों को मुस्कराने पर विवश करेंगे।

व्यंग्य रचनाओं में मुक्ति नाथ मिश्र की 'ध्वनि प्रदूषण का सांस्कृतिक कार्यक्रम', अरविंद पथिक की 'मोई है तो मुमकिन है', जसविंदर सिंह 'रूपल' की 'जब भगवान मेरे बिस्तर से उठकर चले गए…', डॉ. सुरेन्द्र सिंह रावत की 'तेरहवीं', आशीष दशोत्तर की 'साँप पालो तो ऐसे' और आत्माराम भाटी की 'धमकी की धौंस' सम्मिलित हैं।

और साथ ही, अरविंद तिवारी की ''पोल खुल गई' वाला मौसम', लालित्य ललित की 'कलसी और चुप्पी प्रसाद का गठबंधन', मुकेश राठौर की 'दो शब्दों से उपजा शोक', दिलीप कुमार की 'इंटरनेशनल स्कूल' तथा सन्तोष कुमार झा की 'राजभाषा पखवाड़ा और मैं' भी प्रकाशित हैं।

विवेक रंजन श्रीवास्तव की 'सानू की — सभ्यता का नया राग', डॉ. मुकेश असीमित की 'चलो बुलावा आया है', दविंदर सिंह गिल की 'फेसबुक और सोने का अंडा देने वाली मुर्गी', अनिला चारक की 'दिल की कहानी उसकी जुबानी', तथा बी.एल. आच्छा की 'मैं पसंद हूं किसी और की, मुझे हांकता कोई और है' भी इस अंक का हिस्सा हैं।

वीणा सिन्हा की 'कुर्सी का लोकतंत्र', शशिकांत सिंह की 'धर्मपत्नी को शादी की सालगिरह मुबारकबाद', डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' की 'औकात मापन कार्यालय', शांतिलाल जैन की 'वेस्ट नहीं, इन्वेस्टमेंट समझे जाने की जरूरत' तथा रेखा शाह की 'लिफाफे में रसगुल्ला' जैसी रचनाएँ उल्लेखनीय हैं।

कहानी खंड में वृंदावनलाल वर्मा की कहानी 'भीमसेन के लट्ठ' तथा प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'मोटेराम जी शास्त्री' जैसी उल्लेखनीय रचनाएँ पाठकों को आकर्षित करेंगी।

लघुकथा खंड में सआदत हसन मंटो की 'पेश-बंदी' तथा रोहित कुमार 'हैप्पी' की 'दोराहा' प्रकाशित की गई हैं।

काव्य खंड में कबीर की 'व्यंग्यात्मक साखियां और पद', भारतेंदु हरिश्चंद्र की 'मुकरियाँ', 'बेढब' बनारसी की 'बेढब दोहावली', रमानाथ अवस्थी की 'होली में', गंगाप्रसाद पाण्डेय की 'उलाहना' तथा विनोद शर्मा की 'निराला के प्रति' जैसी रचनाएँ सम्मिलित हैं।

इसी खंड में अज्ञेय की प्रसिद्ध कविता 'साँप', नागार्जुन की 'शासन की बंदूक', दुष्यंत कुमार की 'दो ग़ज़लें', काका हाथरसी के 'हास्य-व्यंग्य दोहे', रघुवीर सहाय की 'रामदास', धूमिल की 'मोचीराम', ओम प्रकाश 'आदित्य' की 'इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं', पं० हरिशंकर शर्मा की 'हवाई कवि-सम्मेलन', मधुप पांडेय की 'विचित्र विवशता', अरुण जैमिनी की 'हिन्दी-हत्या' तथा प्रदीप चौबे की 'इस शहर की सभ्यता हद है' प्रस्तुत हैं।

राजेश्वर वशिष्ठ की कविता 'प्रजातंत्र में कबूतर', डॉ वंदना मुकेश की 'मकान और लड़के-लड़कियाँ'  और आराधना झा श्रीवास्तव की 'कविता और पाठक' पढ़िए। 

इनके अतिरिक्त अमरजीत कसक की कविता 'गणतंत्र', गगन संधू की 'गाँव से मॉल तक का सफ़र', प्रीति ढींगरा की 'ट्रैफिक जाम का पुराण', रमिंदर रम्मी की 'शायद मैं एक बुरी औरत हूँ', सफ़िया हयात की 'दूसरा रूप',  डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा ‘अदिति’ की 'तू स्वामिनी मैं चेरी', तरिंदर कौर की 'दीवाली',  डॉ उपासना दीक्षित की दो कविताएं सम्मिलित हैं।    

बाल-साहित्य में 'सबसे सुंदर बच्चा' (अकबर-बीरबल कथा), 'शेख चिल्ली और अंडों की टोकरी' तथा विष्णु शर्मा की पंचतंत्र कथा 'सिंह को जीवित करने वाले' जैसी रोचक कथाएँ भी सम्मिलित हैं।

लोककथा में 'लोभी दर्जी और चतुर मेहमान' प्रस्तुत है।

अंत में राजेश कुमार का अतिथि संपादकीय 'भारत दर्शन का व्यंग्य विशेषांक — एक मीठी चुभन, एक कड़वा अट्टहास' इस विशेषांक को सार्थक बनाता है।

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