(श्री नागार्जुन से क्षमा-याचना सहित)
बहुत दिनों तक जनता रोई
संसद रही उदास
बहुत दिनों तक पत्नी सोई
डरे पति के पास।
बहुत दिनों तक लगी देश में
जासूसों की गश्त
बहुत दिनों तक लेखकों की भी
हालत रही शिकस्त।
चुनाव हुए देश के अन्दर
कई युगों के बाद
फिर से पुरुष मर्द कहलाए
कई युगों के बाद
घर-घर में आजादी आई
कई युगों के बाद
मुन्ने ने किलकारी मारी
कई युगों के बाद।
- प्रेम जनमेजय