वे
जिनके पास कोई घर नहीं
अकसर उन्हीं के पाcस
दिखते हैं घर घोंसलों से।
वे
जो अकसर सो जाते हैं भूखे
दिखने में सबसे तृप्त होते हैं।
वे
कोई भाग्य नहीं जिनका
अकसर सबसे ज्यादा
पूजते हैं भाग्य को।
वे
जिनके पास कुछ नहीं होता
अकसर उन्हीं को देखा है तत्पर
लुटाने को सबकुछ।
वे
जो खुद गुजर करते हैं भीख मांग कर
ईश्वर से मांगते हैं समृद्धि
दाताओं की।
वे
जो अकसर जरूरी हैं हर काम में
वही नहीं पूछे जाते कहीं भी।
वे
जिनमें बसी हैं आँधियां, शोर और चट्टानें
सबसे ज्यादा शांत, चुप और कमजोर
नजर आते हैं अकसर ।
-दिविक रमेश