हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने स्वार्थ के लिए सामने वालों को धमकी देकर डराते हुए अपना काम निकालते रहते हैं। यह धमकी देने का सिलसिला आज से नहीं बल्कि आदिकाल से चला आ रहा है। उस समय भी सत्ता हथियाने के लिए व सामने वाले को डराने के लिए राक्षसी लोग राजा और प्रजा को जान से मारने की धमकी देकर डराते रहते थे।
धमकी का यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। दुनिया के शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ट्रंप हो या चीन के शी जिनपिंग या रूस के पुतिन साहब या फिर दुनिया से अलग-थलग पड़े उतरी कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन ये सभी समय-समय पर धमकी रूपी हथियार का इस्तेमाल कर अपने विरोधियों को डराते रहते हैं। दुनिया के इन वीवीआईपी को तो छोड़ो, हमारे आसपास रहने वाले दबंग लोग भी कमजोरों पर इस हिंसात्मक अस्त्र का उपयोग करते रहते हैं।
अब अमेरिका के महामना डोनाल्ड ट्रम्प को ही देख लो। जब से दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने है, उनके दिमाग में हर किसी को अपने अनुसार चलाने के लिए धमकी का कीड़ा कुलबुलाता रहता है। जब तक किसी को धमकी नहीं दे देते, इनकी कुलबुलाहट मिटती नहीं है। इसलिए वो आए दिन किसी न किसी को धमकी देते रहते हैं।
सत्ता संभालते ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध बंद करने के लिए धमकी दे रहे थे। जब पुतिन ने उनकी धमकी को हवा में उड़ाते हुए तवज्जो नहीं दी तो यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेन्सकी को अपने यहां बुलाकर युद्ध रोकने के लिए डांट पिला दी। पर बात फिर भी नहीं बनी तो रूस से ज्यादा घनिष्ठता और तेल खरीदना बंद करने के लिए भारत को धमकी दे डाली। भारत ने भी उनकी धमकी की धज्जियां उड़ा दी तो ट्रम्प महोदय ने भारत पर टैरिफ का बम फोड़ दिया। फिर महसूस हुआ कि टैरिफ बम का भारत पर असर नहीं हो रहा तो वापस पलटी खा कर टैरिफ कम कर दिया। लेकिन अभी भी धमकी दे रहे हैं कि यदि उसने रूस से तेल खरीदा तो टैरिफ वापस बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
अब जब ट्रंप महोदय की रूस, यूक्रेन, चीन और भारत के सामने धमकी की धौंस नहीं चली तो ट्रंप का निशाना वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। जिनको आधी रात को पत्नी सहित बेडरूम से उठाकर अमेरिका ले आए। अब ईरान के पीछे पड़े हैं। ईरान को आए दिन युद्ध के लिए तैयार रहने की धमकी दे रहे हैं।
ट्रंप महोदय ने तो देशों को ही नहीं, शांति का नोबेल पुरस्कार देने वालों को भी अप्रत्यक्ष रूप से इशारा कर यह उदाहरण दे कर नहीं बख्शा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया। रूस यूक्रेन युद्ध को रोकने के प्रयास किए। ऐसे में उन्हें ही नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाए। लेकिन ट्रंप साहब की इस धमकी का असर पुरस्कार देने वाली कमेटी पर नहीं पड़ा। उन्होंने यह पुरस्कार वेनेजुएला की महिला को दे दिया। मजे की बात यह रही कि उस महिला ने ट्रंप साहब को राजी करने के लिए अपना यह पुरस्कार ट्रंप को देने के लिए उनके पास पहुंच गई और उन्हें सौंप कर उन्हें खुश कर दिया। लेकिन नोबेल वालों ने ट्रंप की खुशी को यह कहते हुए काफूर कर दिया कि नोबेल पुरस्कार किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता।
विदेशी वीवीआईपी ही नहीं हमारे देश के वीवीआईपी नेतागण भी किसी न किसी मसले पर दूसरी पार्टी के नेता को धमकी देने में पीछे नहीं रहते हैं। संसद में विपक्ष का नेतृत्व करने वाले सरकार के खिलाफ बम फोड़ने की धमकी दे चुके हैं, वो बात अलग है कि वो बम आज तक नहीं फटा। अब सेना के चीनी सेना के खिलाफ एक मूवमेंट की अनुमति को लेकर एक किताब में छपे अंश को लेकर देश के प्रमुख की पोल खोलने उनके पीछे पड़े हैं।
धमकी रूपी हथियार का सीधे-सादे लोग भी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए उपयोग करते हैं। इन लोगों में एक दूसरे की बात न मानने पर पति-पत्नी एक दूसरे को। वेतन-भत्तों की मांगों के लिए कर्मचारी व बेरोजगार सरकार को। जमीन-जायदाद के लिए एक भाई दूसरे भाई को। दहेज के लिए जंवाई ससुराल वालों को, आम सुविधाओं के लिए जनता नेताओं को अपनी बात मनवाने के लिए धमकी रूपी हथियार का उपयोग करते रहते हैं।
आज जब मैं घर से निकला तो देखा कि पार्षद पप्पू और काका कबाड़ी एक दूसरे के सामने जोर-जोर से बोल रहे थे। मैं पास गया और वहीं पर खड़े पांडे जी से पूछा कि क्या बात है व किस बात को लेकर गरमागरमी हो रही है?
पांडे जी ने कहा कि काका कबाड़ी का कहना है कि हम आए दिन सड़क पर से गुजर रहे गंदे पानी के कारण परेशान हैं। गंदे पानी की बदबू से पूरी गली सड़ांध मारती रहती है। काका ने कुछ लोगों को साथ लेकर पार्षद को गंदे पानी की निकासी के लिए सीवर लाइन बनाने का आग्रह किया। पार्षद ने इस समस्या से जल्द निजात के लिए हामी भरी दी और सर्वे के लिए एक टीम भी गठित कर दी।
लेकिन जब सर्वे वाले आए तो उन्होंने कुछ मकानों को सीवर लाइन बनने में बाधा मानकर नाली बनाने का ही सुझाव दिया। लेकिन काका कबाड़ी का कहना है कि मैं नाली नहीं बनने दूंगा। इसका परमानेंट हल सीवर लाइन है। इसलिए आप सीवर लाइन डालिये, क्योंकि अगर नाली बनाई गई तो मुहल्ले के मकानों में सीलन आएगी जिसके कारण दशकों पुराने मकानों के गिरने की संभावना हो जाएगी।
बस, इसी बात को लेकर काका कबाड़ी ने यह धमकी दे दी है कि यदि यहां पर नाली बनाने का काम किया गया तो मैं अपनी जान दे दूंगा। दूसरी तरफ काका कबाड़ी की जान देने की धमकी पर पलटवार करते हुए पार्षद पप्पू के समर्थक मित्रों ने यह कह दिया कि एक बार नाली बनने दो बाद में सीवर लाइन बन जाएगी।
अब इन दोनों तरफ की आपसी जिद्द के कारण काफी वर्षों से चली आ रही इस समस्या का हल नहीं निकल पा रहा। यह मसला मुहल्ले में नाली चाहने वाले और सीवर लाइन चाहने वालों की आपसी लड़ाई की भेंट चढ़ा हुआ है। इसी को लेकर आए दिन काका कबाड़ी जान देने की धमकी देकर समस्या को बनाए रखे हुए हैं। इस लड़ाई में मुहल्ले के लोग सड़क पर बहने वाले गंदे पानी की बदबू से नाहक ही परेशान हो रहे हैं।
धमकी का उपयोग और भी कई अवसरों पर होते हुए हम देखते रहते हैं। अब बेरोजगारों को ही देख लो। पहले वेकेंसी निकालने की धमकी देते हैं। जब परीक्षा में पास हो जाते हैं और सरकार उनकी नियुक्ति में विलंब करती है तो जान देने की धमकी रूपी ब्रह्मास्त्र का उपयोग करते हैं।
इसी तरह यदि मुहल्ले में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है तो मुहल्ले के कुछ युवा जोश में पानी की टंकी पर चढ़कर जान देने की धमकी देने लगते हैं। तब समझा-बुझाकर जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें नीचे उतारा जाता है, जबकि पता है कि यह केवल सूखी धमकी है। जान देना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन लोग इस हथियार का उपयोग समस्या को मिटाने के लिए करते रहते हैं।
आपको याद होगा फिल्म शोले का वो सीन जब हमारे धर्मेंद्र जी बसंती के प्यार के चक्कर में टंकी पर चढ़कर जान देने की धमकी देते हैं और इस धमकी के बाद मौसी राजी हो जाती है। शायद टंकी पर चढ़ कर जान देने की थोथी धमकी की शुरुआत तभी से हुई लगती है।
लेकिन साथ ही यह बात भी सही है कि यदि धमकी नहीं देते तो काम भी तो नहीं होता। इस धमकी का कमाल ही है कि काम तुरंत हो जाता है।
वैसे साहित्य में भी धमकी की धमक देखी जाती रही है। जब एक साहित्य के स्वयंभू मठाधीश आयोजक को यह धमकी देता है कि अगर उसे अतिथि बनाना है तो वो नहीं आना चाहिए। या फिर अगर मेरे मठाधीश रहते सम्मान चाहिए तो मेरी हाजरी में रहना होगा ना कि मेरे विरोधी के साथ।
इस तरह धमकी की धौंस का असर कई जगह जबरदस्त होता है तो कई जगह धमकी धरी रह जाती है। फिर भी आज के समय में अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए एक बार धमकी की धौंस दिखाने का उपयोग करने में पीछे नहीं रहना चाहिए।
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