विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

चाय खत्म हो गई थी | व्यंग्य

डॉ पी. एस. ढींगराडॉ पी. एस. ढींगरा

उसने घंटी बजाई और हंसराज से चाय लाने को कहा। वह टॉयलेट गया और अपना चेहरा धोया, शीशे के सामने खड़ा होकर बाल कटवाने ही वाला था कि अचानक उसकी चीख उसके गले में अटक गई। शीशे में दिख रही काली भेड़ जीभ निकालकर अपनी आँखें निकाल रही थी। शीशे से मुँह फेरकर वह सोचने लगा कि इसका मतलब है कि ऑफिस में कोई काली भेड़ ज़रूर होगी। उसने एक बार फिर शीशे में देखने की कोशिश की, लेकिन भेड़ पीली नहीं हुई थी, बल्कि उसका रंग और भी गहरा हो गया था।

उसके मन में ख्याल आया कि अगर सरकार को शीशा दिखाया जाए, तो सरकार में काली भेड़ों का झुंड हो सकता है। लेकिन सरकार को शीशा कैसे दिखाया जा सकता है? चुनाव के समय मौका मिलता है, लेकिन तब सरकार गारंटी, लालच और लालच देकर वोटरों की तरफ शीशा घुमा देती है, और वोटर धोखे में काली भेड़ें चुन लेते हैं, जो राजधानी जाकर ऐसे सफेद हो जाती हैं जैसे उन्हें मशरूम का कॉस्ट्यूम पहना दिया गया हो या निरमा पाउडर से मशीन में धोकर धूप में सुखा दिया गया हो। उन्होंने कुर्सी से अपनी पकड़ तोड़ी और स्टेनो से एक नोटिस लिखवाया कि सुबह की अटेंडेंस के बाद सभी कर्मचारी बड़े ऑफिस में इकट्ठा होंगे और शीशे में अपना चेहरा देखेंगे ताकि गलत लोगों की पहचान हो सके। कल किसी को छुट्टी नहीं मिलेगी। इस नोटिस को बहुत ज़रूरी समझा जाना चाहिए। जो कर्मचारी गैरहाज़िर रहेगा, उसके खिलाफ़ डिसिप्लिनरी एक्शन लिया जाएगा। ऑर्डर के हिसाब से...

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