आजकल फेसबुक पर बधाइयों और का दौर जारी है बल्कि यूं कहिये उसमें दिल की इन्वॉल्वमेंट ज्यादा है, जैसे दिल से मुबारक, दिल से बधाई, दिल बेचारा बहुत परेशान है। सोच रहा है कि मुझे ही क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है, मुझे मालूम ये सब झूठ बोल रहे हैं, मेरा इस मुबारक से कोई संबंध नहीं है!

अच्छा होता कि मुबारक का जिम्मा दिल से न कह कर बल्कि बॉडी के अलग अलग पार्ट्स को बांट दिया, यानि कर्तव्यों का विकेन्द्रीयकरण कर दिया जाये और कहा जाये, भाई साहिब आप को किडनी से मुबारक, गाल ब्लैडर से मुबारक, लीवर, पैनक्रियाज और फेफड़ों से मुबारक आदि आदि।

बॉडी के ऑर्गन का कब और कैसे चुनाव हो ये अवॉर्ड के बड़े या छोटे होने पर निर्भर हो, यानि बड़े अवॉर्ड को ही दिल से जोड़ा जाए और छोटे अवॉर्ड को छोटे ऑर्गन से, अगर छोटा अवॉर्ड है और कोई वैल्यू नहीं रखता तो उसे जीभ से मुबारक। इससे क्या होगा कि किसी ऑर्गन की तौहीन भी नहीं होगी और बात सध जाएगी।

 आम तौर पर पर सब जीभ से ही मुबारक देते हैं पर ज्यादा प्रभाव डालने के लिए उसे दिल से जोड़ देते हैं, बेचारा दिल डर के मारे ये कहते कहते चुप हो जाता है कि ये दिल से नहीं है, ये लोग तुम्हें मूर्ख बना रहें हैं, मेरी इसमें कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं है, वह यह कहते कहते चुप हो जाता है कि बॉडी में और भी ऑर्गन हैं उनके साथ जोड़ कर मुबारक क्यों नहीं देते, वो इसलिए कि मैं बहुत सीधा साधा हूं और बहुत भावुक हूं, बाकी लोग पेचदार हैं, घुमावदार हैं, अगर आप कहेंगे कि किडनी की तरफ से मुबारक तो कोई नहीं मानेगा, और तो और सब कहते हैं हृदय तल से मुबारक तो स्पष्ट बता दूँ, मेरा कोई तल नहीं है, जाने कहां से इन लोगों ने मेरा तल ढूंढ़ लिया और मुझे रसातल पहुंचा दिया, ये लोग बधाई की इंटेंसिटी बढ़ाने के लिए तल का भी ईजाद कर चुके हैं, कई लोग जब बधाई देते हैं और कहते हैं मैं दिल पर हाथ रख कर कहता हूँ, आप की उपलब्धि पर बड़ी खुशी हुई, पर वो उन्हें उल्लू बनाने के लिए लेफ्ट की बजाय राइट स्थान पर हाथ रख कर कहते हैं, जहां दिल का वास नहीं होता। 

कभी कभी तो वो कहते हैं मेरा दिल कहता है, यह अवॉर्ड तुम्हें मिलेगा, पर मैं नाचीज़ हूं, खुदा तो नहीं जो अवार्ड के लिए भविष्यवाणी करूं, ये बधाई देने वाले अपना सिक्का जमाने के लिए मेरा ही सहारा क्यों लेते हैं। 

मुझे इक गाना याद आ रहा है दिल तो दिल है दिल का एतबार क्या कीजे।

एक तरफ यह कहते हो दिल से कह रहा हूं, दिल से मुबारक एक तरफ दिल का एतबार नहीं करते, जब एतबार नहीं करते तो दिल से सब कुछ क्यों कहते हो?

फिर गाना बनाते हो दिल तो पागल है।

अगर दिल पागल है तो, पागल को इतनी अहमियत क्यों देते हो। 

फिर गुलज़ार साहिब गाना बनाते हैं दिल तो बच्चा है जी मन का कच्चा है जी। 

ठीक है मैं मन का कच्चा हूँ 

मुझे कच्चा ही रहने दें।

और आगे से दिल का उपयोग करके किसी पुरस्कार युक्त या सम्मान ग्रस्त, या फिर किसी और को बहलाएं फुसलाए नहीं। 

मुझे किसी से लेना देना नहीं है। 

अब गुनगुनाया जा रहा है दिल के द्वारा अरे दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहां कोई न हो, हमनशीं कोई न हो दिलरुबा कोई न हो, वह घबरा गया कि मैं ही चल पड़ा तो बॉडी का क्या होगा।

मैं क्यों ले चलूँ, हम ने कॉन्ट्रैक्ट लिया है तुम्हें ले जाने का, खुद ही चले जाओ अगर हिम्मत है तो। दिल आज बहुत बेचैन हो उठा है, वह रो रहा है बुरी तरह और कह रहा है मुझे इमोशनली भुनाया जा रहा है, गानों पर लाखों रुपए कमाए जा रहे हैं। मुझे इस्तेमाल करके और मेरे हाथों में कुछ नहीं है। 

दिल हाथ मल रहा था, गाना चल रहा है- कुछ दिल ने कहा कुछ भी नहीं, दिल बोला कुछ भी नहीं। 

मुझे बख्श दो दुनियावालो। एक लड़का गुनगुना रहा है, दिल की गिरह खोल दो चुप न बैठो कोई गीत गाओ, दिल को धक्का लगा बताओ। अब मेरी गिरह खोली जा रहीं है, फिर मुझे खोल कर गीत बनाया है। दिल गुस्से से फूट पड़ा बोला यार अपने दिमाग की गिरह खोलो जो फेसबुक, व्हाट्सऐप में उलझ गया है मुझ पर कोई ईजाद नहीं करो। 

एक बुड्ढा रास्ते से गाता जा रहा है- दिल विल प्यार व्यार मैं क्या जानू रे। दिल भभक उठा- अरे बुड्ढे इस उमर में इस शिथिल दिल से गा रहा है, अब अपना और पराया जानने की तेरी उम्र गई, ये रास्ता कब्र की और जाता है। वहां प्रस्थान करके कब्र की शोभा बढ़ा, और निकल इस दुनिया से। 

दिल सुन रहा है पर्दे के पीछे एक आदमी डांस करते करते गा रहा है। 

दिल ने फिर याद किया बर्फ सी लहर आई है, फिर कोई चोट मोहब्बत की उभर आयी है। दिल ने मुख बिचकाया बोला- अबे मैं बिल्कुल याद नहीं कर रहा, और मोहब्बत की चोट पर एक और चोट कर और मर जा, रही बर्फ सी लहर जो आ रही है, इसे भीषण गरमी में इस्तेमाल कर और आनंद ले। 

दिल के कानों में एक गाना गुंजायमान है- दिले नादान तुझे हुआ क्या हुई। आखिर इस दर्द की दवा क्या हुई। दिल बोला- मिर्जा साहिब पहले तो मुझे कुछ नहीं हुआ अगर हुआ भी है तो दवा ढूंढ़ने का प्रयास नहीं करना, अभी तो कुछ नहीं हुआ पर दवा ढूंढ़ते ढूंढ़ते तू पगलाया जाएगा, वो इसलिए कि असली दवाएं कही नहीं मिलतीं। कहीं इन दवाओं के चक्कर में बिल्कुल संसार से नदारद हो जाऊँ। अभी तो थोड़ा बचा हुआ हूं, खून सप्लाई कर रहा हूं। करने दीजिए, मैं हाथ जोड़ता हूं कि मुझे भावनात्मक रूप से न भुनाया जाये आपकी अति कृपा होगी। 

इतने में किसी बावले आदमी ने फेसबुक पर लिखा हार्टलेस कांग्रेचुलेशन। उसने दिल की बात पढ़ ली, आज दिल बड़ा खुश है। 

गा रहा है- ए दिल मुझे बता दे तू किस पे आ गया है, जिसने बख्शा है अभी बस उसपे आ गया है।

-अनिल चाड़क