अभी-अभी एक बहुत बुरा समाचार मिला है। एक प्रमुख चिकित्सक डॉक्टर जी० डब्लू० ब्राइल ने कहा है--यदि आदमी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे तो वह 80 वर्ष तक डट कर काम कर सकता है। यह ब्राइल महोदय भी क्या आदमी हैं !

पहली बात तो यह है कि आदमी अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान दे और डट कर काम करे यह दोनों कैसे हो सकता है। बिना अपनी हेल्थ चौपट किये डट कर काम करना हमें तो साहब, किसी ने नहीं बताया।

फिर आखिर अस्सी वर्ष तक काम पर डटे ही रहने का ऐसा भी क्या मोह? मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जो बिना नागा अपने काम या दफ्तर पहुँचते हैं। लोग समझते हैं कि उन्हें काम से बड़ा प्रेम है। लेकिन उसके पीछे बात दूसरी रहती है। उनके घरों में जरूर कोई-न-कोई उनके सिर पर डंडा लिये सवार रहता है।

कोई भी आदमी जो डॉक्टर ब्राइल के शब्दों में अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देता होगा वह पचास तक पहुँचते-पहुँचते अपने काम से खासा उकता चुका होगा। आगे अगर वह फिर भी काम करता है तो उसका काम के प्रति मोह समझिये या फिर उसकी जरूरतमंदी।

मैं जानता हूँ कि काम करना बल्कि काम पर डटे रहना अपनी घबराहट और दिमागी अव्यवस्था का द्योतक है। कहाँ आराम, स्वास्थ्य का पूरा ध्यान और कहाँ अस्सी वर्ष काम। दफ्तर में दूसरे लोग उस अस्ती वर्ष वाले काम-काजी बुड्‌ढे के बारे में क्या राय बनायेंगे, यह भी एक सोचने वाली बात है।

सब से अच्छी बात तो यह है कि आप इतना पैसा कमा लें कि सत्ताइस वर्ष की उम्र के बाद आपको काम करने की जरूरत ही न हो। अगर यह सम्भव न हो तो जब भी आप पायें कि आप के पास काफी पैसा हो गया है, आप फौरन ही काम बन्द कर दीजिये--चाहे किसी दिन सवा ग्यारह या साढ़े बारह बजे दिन में ही सहसा आपको यह शक्ति प्राप्त हो जाए। तभी आप के पास अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देने के लिए समय होगा। अगर आप को काम ही करना है तो फिर अच्छा स्वास्थ्य रखने का विचार ही एकदम बेतुका है। समझे?

-केशवचन्द्र वर्मा 
*राबर्ट बैचले की रचना पर आधारित (1961)