भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।

महाकवि की पुरस्कार वापसी  (विविध)

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Author: राजेशकुमार

महाकवि चर्चा में रहते हैं, मतलब जिसमें भी रहते हैं, उसे भी चर्चा कहते हैं। वे अपने खुद के लिए और अपनी रचनाओं के लिए खुद ही बहुचर्चित, लोकप्रिय, सुपरिचित, विख्यात, अतिसक्रिय, जैसे शब्दों का खुल्लम-खुल्ला इस्तेमाल करते रहते हैं, और इस दृष्टि से उन्हें आत्मनिर्भर ही कहा जाएगा, और क्या? 

महाकवि ने इन दिनों फिर से खुद को चर्चा में स्थापित कर लिया है, क्योंकि उन्होंने घोषणा की है कि वे पुरस्कार वापस कर रहे हैं। 

इस बात को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल है, जो उन तक पहुँच रहे हैं, लेकिन वे फिलहाल उनका जवाब देना मुनासिब नहीं समझ रहे, और कह रहे हैं कि उचित समय पर उचित जवाब देंगे। 

मसलन लोग पूछ रहे हैं कि क्या वे पुरस्कार इसलिए वापस कर रहे हैं, जो कि वे सरकार के किसी काम से नाखुश हैं और अपना विरोध प्रदर्शित दर्ज करवाना चाहते हैं? 

या लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या वे टुकड़े-टुकड़े गैंग, या अर्बन नक्सल, जा आतंकवादी, क्या राष्ट्र-विरोधी समूहों में शामिल हो गए हैं या उनके साथ उन्होंने हमदर्दी पैदा कर ली है और इसलिए वे पुरस्कार लौटा रहे हैं? 

या लोग जानना चाहते हैं कि क्या उन्हें लगता है कि वे इस पुरस्कार के योग्य नहीं है, क्योंकि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है कि उन्हें यह पुरस्कार दिया जाए? 

लोगों के मन में यह भी सवाल है कि क्या उन्हें लगता है कि यह पुरस्कार उनके कद के हिसाब से निचले दर्जे का है और इसलिए वे इसे स्वीकार नहीं करना चाहते?

या क्या वे यह कहना चाहते हैं कि उनकी बजाय यह पुरस्कार दूसरे महाकवि को मिलना चाहिए, जो उनसे बेहतर और अधिक काम कर रहे हैं? 

क्या वे यह पुरस्कार इसलिए नहीं लेना चाहते, क्योंकि पुरस्कार की राशि कम है या पुरस्कार देने वाले अधिक राशि पर हस्ताक्षर करवाकर कम राशि देते हैं? 

क्या वे यह पुरस्कार इसलिए वापस कर रहे हैं कि वे सैद्धांतिक कारणों से पुरस्कार देने वाली संस्था के कामकाज का समर्थन नहीं करते? 

यह क्या वे यह पुरस्कार अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के कारण लौटा रहे हैं?

क्या वे यह पुरस्कार इसलिए लौटा रहे हैं कि उन्हें लगता है कि अब उनको बहुत से पुरस्कार मिल चुके हैं, और वे आगे पुरस्कार नहीं लेना चाहते, और चाहते हैं कि नई पीढ़ी को पुरस्कार दिए जाएँ?
 
क्या इसकी वजह यह है कि वे पुरस्कारों के माया-मोह से ऊपर उठ चुके हैं और अब ये छोटी-मोटी चीज़ें उनके लिए कोई मायने नहीं रखतीं? 

या इसका कारण यह है कि उनकी धर्म की पत्नी ने उन्हें चेतावनी दे दी है कि घर में अब और ज़्यादा जगह नहीं बची और कोई और पुरस्कार घर में नहीं आना चाहिए। 

लोग तरह-तरह के कयास भिड़ा रहे हैं, लेकिन सच्ची बात किसी की भी समझ में नहीं आ रही। 

जब महाकवि ने लोगों को इतना परेशान होते हुए देखा, तो उन्होंने सोचा कि अब फिर से चर्चा में आने का समय हो गया है, और उन्होंने इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण जारी कर दिया। 

उन्होंने साफ़ शब्दों में, बिना किसी लाग-लपेट के, बिना शब्दों से खिलवाड़ किए बताया कि यह पुरस्कार उन्हें बिना किसी प्रयास के मिल गया है, इसलिए इसे लेना उनके सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि इस पुरस्कार के लिए न तो उन्होंने कोई जोड़-तोड़ किया, न किसी दूसरे का नाम हटाकर अपना नाम रखवाने का षड्यंत्र किया, मैं किसी तरह के ग़लत प्रमाण-पत्र आदि जुटाकर उन्होंने पुरस्कार समिति को भेजें, न पुरस्कार समिति के सदस्यों की जानकारी हासिल करके किसी तरह की लॉबिंग की, न विभिन्न प्रतिष्ठित लोगों और संस्थाओं के द्वारा पुरस्कार देने वाली संस्था को संस्तुति पत्र भिजवाए, न पुरस्कार समिति के सदस्यों को दावत आदि पर बुलाया, मैं उन्हें इसी तरह की कैश या काइंड में अर्थात नगद या मूल्यवान वस्तु के रूप में रिश्वत आदि देने की पेशकश की, और इसलिए उन्हें यह पुरस्कार लेने का कोई अधिकार नहीं है। वे पुरस्कार के हकदार नहीं हैं, और इस पर उनका कोई दावा नहीं है।

चारों तरफ उनकी तारीफ़ होने लगी, उनके इस त्याग का डंका हर तरफ़ बजने लगा, उनके विरोधी भी उनकी प्रशंसा करने से नहीं थक रहे थे, मतलब यह है कि उन्हें पुरस्कार मिलने से ज़्यादा प्रसिद्धि पुरस्कार लौटाने के कारण हो गई। उन्हें तो बस यही चाहिए था, और वे मुतमइन भी हो गए थे, लेकिन इस बीच पुरस्कार देने वाली संस्था ने घोषणा जारी की थी उन्होंने महाकवि को कोई पुरस्कार नहीं दिया। तो आजकल महाकवि इस गुनताड़े में लगे हुए हैं कि किस तरह से उस संस्था की इस घोषणा की कोई काट करें, ताकि उनकी जो किरकिरी किससे हुई है, उसे सम्मानपूर्वक संभाला जा सके। 

-प्रो. राजेशकुमार
 7 अक्तूबर 2021

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