भवानीप्रसाद मिश्र के वनलाइनर

रचनाकार: भवानीप्रसाद मिश्र

  • बदलाव के लिए तलवार की धार नहीं, छंद की मार चाहिए। 

  • कविता उपदेश के लिए नहीं है। आज हमें उपदेश नहीं, अपना देश चाहिए। देश की हालत बहुत खराब है। उसे बदलने के लिए कई मोचों पर लड़ना पड़ेगा। कविता नी उनमें से एक मोर्चा है। दुनिया और किसी चीज से नहीं, शब्द से बदलेगी। इसके लिए तलवार की धार नहीं, छंद की मार चाहिए।

  • आजकल के बड़े कवि छंद छोड़कर लिखने का एक तमाशा कर रहे हैं, लेकिन हमारी बोली में जो लय है, उसका छंद सबसे बड़ा है, अगर हमारी कविता में हमारी बोली नहीं बजती तो कविता गंगी हो जाती है। ऐसे ही गूंगे कवि, जिन्हें मै भी नहीं समझ पाता, आजकल बड़े कवि कहे और माने जा रहे हैं। कविता बड़ी मुश्किल चीज़ है। सारी ज़िंदगी में भी यदि एक कविता ठीक से बन गयी तो बड़ी बात है।

  • सूर और मीरा के पद अभी तक टिके हुए हैं, लेकिन आनंद बक्षी का गीत सुबह जन्म लेता है और शाम को मर जाता है, क्योंकि उसने पीछे उनका मन नहीं, केवल पैसा है।