शरद जोशी का व्यंग्य 'है भी मगर नहीं है'--प्रभात गोस्वामी की आवाज़ में
प्रभात गोस्वामी, समकालीन व्यंग्य लेखन और रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम है। अब तक छह व्यंग्य संग्रह, रेडियो प्रसारण पर एक किताब के साथ उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाई है। उनके व्यंग्य देश के प्रमुख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। रेडियो प्रसारण से उनका खास लगाव रहा है। एक उद्घोषक के साथ कमेंटेटर के रूप में उनकी खास पहचान बनी हुई है। खेल प्रसारण खासकर क्रिकेट कॉमेंटेटर के रूप में विगत 45 सालों से सक्रिय गोस्वामी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में हिंदी में आंखोदेखा हाल सुनाते आ रहे हैं। आप सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, जयपुर (राजस्थान) से सेवा निवृत्त संयुक्त निदेशक हैं । वहीं राज्य सरकार से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार के रूप में भी पंजीकृत हैं।
प्रस्तुत है, शरद जोशी का व्यंग्य 'है भी मगर नहीं है'--प्रभात गोस्वामी की आवाज़ में।