कुछ वन लाइनर
रचनाकार: नील मणि
- आस्था निजी होनी थी, राजनीति सार्वजनिक हो गई।
- भगवान मौन हैं, उनके ठेकेदार शोर करते हैं।
- परीक्षा ज्ञान की नहीं, धैर्य की होती है—सालों तक।
- डिग्री हाथ में है, भविष्य वेटिंग लिस्ट में।
- बेरोज़गारी इतनी बढ़ गई है कि मेहनत भी शर्मिंदा है।
- सपने इंटरव्यू तक पहुँचते हैं, नौकरी सिफ़ारिश तक।
- हुनर मुफ़्त है, काम महँगा।
- सत्ता पाने के बाद कान बहरे हो जाते हैं।
- प्रजातंत्र फाइलों में सुरक्षित है।
- जेब कटे तो चोरी, हक कटे तो नीति।
- सत्य ईएमआई पर है, जिंदगी ब्याज में है।
- यहाँ जाति पहले, इंसानियत आखिर में आती है।
-नील मणि