विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग
 
न्यूज़ीलैंड में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास पुस्तक का विमोचन (विविध)     
Author:भारत-दर्शन

10 जनवरी 2020 (वैलिंग्टन): 10 जनवरी को वैलिंग्टन में प्रवासी दिवस व विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के उच्चायुक्त मुक्तेश परदेशी ने 'न्यूज़ीलैंड में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास' पुस्तिका का विमोचन किया व इसके डिजिटल संस्करण को भी मोबाइल फोन द्वारा लोकार्पित किया गया। यह पुस्तिका ए5 आकार की है और इसमें 56 पृष्ठ हैं।  इसमें 1930 से अब तक का इतिहास उपलब्ध करवाया गया है। 

मुद्रित संस्करण का  विमोचन करते ही उच्चायुक्त मुक्तेश परदेशी ने पुस्तक पर दिया 'क्यूआर कोड' मोबाइल पर 'स्कैन' किया गया और यह पुस्तिका भारत-दर्शन द्वारा विकसित अतिआधुनिक 'डिजिटल पुस्तकालय' के माध्यम से उपलब्ध हो गई। यह डिजिटल पुस्तकालय अपनी तरह का अनूठा पुस्तकालय है जिसमें डेस्कटॉप के लिए 'फ्लिप बुक' और मोबाइल के लिए 'ई-बुक' का विकल्प उपलब्ध करवाया गया है।

इस समारोह का आयोजन भारतीय उच्चायोग और व वैलिंग्टन हिंदी स्कूल ने किया था।  इस अवसर पर भारत के उच्चायुक्त मुक्तेश परदेशी, द्वितीय सचिव परमजीत सिंह, भारत-दर्शन के संपादक रोहित कुमार 'हैप्पी' और वैलिंग्टन हिंदी स्कूल की संचालिका सुनीता नारायण उपस्थित थे।  इसे भारत-दर्शन के संपादक रोहित कुमार 'हैप्पी' ने लिखा है।

इस समारोह में पहले वैलिंग्टन हिंदी स्कूल की संचालिका सुनीता नारायण द्वारा 'हिंदी और इसका भविष्य' पर चर्चा-परिचर्चा हुई।  उन्होंने एक 'स्लाइड शो' के माध्यम से अपने आलेख का संक्षिप्त विवरण दिया। 

इस समारोह में भारत के उच्चायुक्त को इस पुस्तक की अगली श्रृंखला 'न्यूज़ीलैंड की हिंदी यात्रा' की संक्षिप्त विवरणिका भी दी गई। 'न्यूज़ीलैंड की हिंदी यात्रा' को  रोहित कुमार 'हैप्पी' और डॉ पुष्पा व भारद्वाज-वुड ने लिखा है।  आगामी पुस्तक 'न्यूज़ीलैंड की हिंदी यात्रा' का प्रकाशन शीघ्र हो रहा है। इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध करवाया जाएगा। इस पुस्तक का शोध पत्र संस्करण अब उपलब्ध है।  

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