यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
मुकाम (काव्य)    Print  
Author:डॉ रमेश पोखरियाल निशंक
 

हमेशा छोटी-छोटी
गलतियों से बचना
अच्छा होता है,
छोटी-छोटी गलतियों
से ही इनसान
ऊँचाइयों को खोता है,
इनसान को देखो तो
वह पहाड़ से नहीं
पत्थरों से ठोकर खाता है।
जो ठोकर खाकर
सँभल जाए
वही अपना मुकाम पाता है।

- रमेश पोखरियाल ‘निशंक'
    [सृजन के बीज]

 

 

 

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