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झिलमिल आई है दीवाली - भारत-दर्शन संकलन

जन-जन ने हैं दीप जलाए
लाखों और हजारों ही
धरती पर आकाश आ गया
सेना लिए सितारों की
छुप गई हर दीपक के नीचे
देखो आज अमावस काली
सुंदर-सुंदर दीपों वाली
झिलमिल आई है दीवाली

 
एक दीया मस्तिष्क में जलाएं - दीपा शर्मा | फीजी

आजकल हर समय विचारों के झंझावात चलते रहते हैं
सही गलत का नहीं पता कुछ, बस यह यूं ही बढ़ते रहते हैं 
कभी किसी बात में होता चिंतन किसी ने मनन 
यह यूं ही चलता रहा,  समय हर क्षण। 

 
भाई दूज - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

भैया दूज

 
काश! मुझे कविता आती - आशीष मिश्रा | इंग्लैंड

काश! मुझे कविता आती
                लिख देता उनको पुस्तक-सा
  प्रेम भरा दोहा लिखता 
                लिख देता उनको मुक्तक-सा।

 
राम  - आशीष मिश्रा | इंग्लैंड

  लिखने को कुछ और चला था
                   स्वतः कलम ने राम लिखा
    र पर आ की एक मात्रा
                   म मिल कर निष्काम लिखा

 
त्रिलोक सिंह ठकुरेला की मुकरियाँ - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

जब भी देखूं, आतप हरता।
मेरे मन में सपने भरता।
जादूगर है, डाले फंदा।
क्या सखि, साजन? ना सखि, चंदा।

 
दोस्त एक भी नहीं जहाँ पर  - भगवतीचरण वर्मा

दोस्त एक भी नहीं जहाँ पर, सौ-सौ दुश्मन जान के, 
उस दुनिया में बड़ा कठिन है चलना सीना तान के।

 
दीवाली : हिंदी रुबाइयां - उदयभानु हंस | Uday Bhanu Hans

सब ओर ही दीपों का बसेरा देखा,
घनघोर अमावस में सवेरा देखा।
जब डाली अकस्मात नज़र नीचे को,
हर दीप तले मैंने अँधेरा देखा।।

 
मुस्कान - डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड

उन्होंने कहा-- 
तुम्हारी मुस्कान में
एक जादू है।
बहुत ही प्यारी और निश्छल है।

 
अल्लामा प्रभु की कविताएं - अल्लामा प्रभु

हाय!  हाय शिव
आपने मुझे जन्म क्यों दिया?
क्या आप मेरी जगह उड़ा नहीं सकते थे
कोई वृक्ष या झाड़ी?

 
दीवाली का सामान - भारत-दर्शन संकलन | Collections

हर इक मकां में जला फिर दिया दिवाली का
हर इक तरफ को उजाला हुआ दिवाली का
सभी के दिन में समां भा गया दिवाली का
किसी के दिल को मजा खुश लगा दिवाली का
अजब बहार का है दिन बना दिवाली का।

 

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