जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

बाल-साहित्य

बाल साहित्य के अन्तर्गत वह शिक्षाप्रद साहित्य आता है जिसका लेखन बच्चों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर किया गया हो। बाल साहित्य में रोचक शिक्षाप्रद बाल-कहानियाँ, बाल गीत व कविताएँ प्रमुख हैं। हिन्दी साहित्य में बाल साहित्य की परम्परा बहुत समृद्ध है। पंचतंत्र की कथाएँ बाल साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हिंदी बाल-साहित्य लेखन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। पंचतंत्र, हितोपदेश, अमर-कथाएँ व अकबर बीरबल के क़िस्से बच्चों के साहित्य में सम्मिलित हैं। पंचतंत्र की कहानियों में पशु-पक्षियों को माध्यम बनाकर बच्चों को बड़ी शिक्षाप्रद प्रेरणा दी गई है। बाल साहित्य के अंतर्गत बाल कथाएँ, बाल कहानियां व बाल कविता सम्मिलित की गई हैं।

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बरखा बहार - भव्य सेठ

देखो भाई बरखा बहार
लेकर आई बूंदों की फुहार
रिमझिम-रिमझिम झड़ी लगाई
धरती कैसी है मुसकाई
लहराते पत्ते-पत्ते पर
हरियाली इसने बिखराई

ऋतुओं ने किया शृंगार
देखो आई बरखा बहार
झूम उठा मौसम चित्तचोर
नाच उठा जंगल में मोर
चमचम-चमचम बिजली बरसे
रिमझिम-रिमझिम बादल बरसे

 
नटखट चिड़िया - रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

ची-ची करके गाती चिड़िया
सबका मन बहलाती चिड़िया।
फुदक-फुदक कर नाचे चिड़िया
मुनिया बैठी बाँचे चिड़िया।

 
ऐसा वर दो  - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

भगवन् हमको ऐसा वर दो।
जग के सारे सद्गुण भर दो॥

 
मेरा भी तो मन करता है - डॉ. जगदीश व्योम

मेरा भी तो मन करता है
मैं भी पढ़ने जाऊँ
अच्छे कपड़े पहन
पीठ पर बस्ता भी लटकाऊँ

क्यों अम्मा औरों के घर
झाडू-पोंछा करती है
बर्तन मलती, कपड़े धोती
पानी भी भरती है

 
सीधा-सादा  - शेरजंग गर्ग

सीधा-सादा सधा सधा है 
इसी जीव का नाम गधा है
इसपर कितना बोझ लदा है 
पर रहता खामोश सदा है 
ढेंचू ढेंचू कह खुश रहता 
नहीं शिकायत में कुछ कहता 
काम करो पर नहीं गधे-सा
नाम करो पर नहीं गधे-सा

-शेरजंग गर्ग 
[इक्यावन बाल कविताएँ, 2009, आत्माराम एंड संस, दिल्ली]

 
कैंप गीत - डॉ. वंदना मुकेश | इंग्लैंड

इक नया भारत यहाँ बसाएंगे
नये इस बगीचे को प्यार से सजाएंगे

 
पापा, मुझे पतंग दिला दो  - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

पापा, मुझे पतंग दिला दो,
भैया रोज उड़ाते हैं।
मुझे नहीं छूने देते हैं,
दिखला जीभ, चिढ़ाते हैं॥

 
बनमानुस की दर्दनाक कहानी  - मुंशी प्रेमचंद | Munshi Premchand

आज हम तुम्हें एक बनमानुस का हाल सुनाते हैं। सामने जो तसवीर है, उससे तुम्हें मालूम होगा कि बनमानुस न तो पूरा बंदर है, न पूरा आदमी। वह आदमी और बन्दर के बीच में एक जानवर है। मगर वह बड़ा बलवान होता है और आदमियों को बड़ी आसानी से मार डालता है। वह अधिकतर अफ्रीका के जंगल में पाया जाता है।

 
दादी कहती दाँत में | बाल कविता - प्रीता व्यास | न्यूज़ीलैंड

दादी कहती दाँत में मंजन नित कर नित कर नित कर 
साफ़-सफाई दाँत जीभ की नितकर नित कर नित कर। 
 
सुन्दर दांत सभी को भाते 
आकर्षित कर जाते, 
खूब मिठाई खाओ अगर तो 
कीड़े इनमें लग जाते, 
दोनों समय नियम से मंजन नित कर नित कर नित कर 
दादी कहती दांत में मंजन नित कर नित कर नित कर। 

 
कम्प्यूटर | बाल गीत  - रेखा राजवंशी | ऑस्ट्रेलिया

नहीं चाहिए मुझको ट्यूटर
माँ मुझको ला दे कम्प्यूटर।

 
दीदी को बतलाऊंगी मैं | बाल कविता - दिविक रमेश

बड़ी हो गई अब यह छोड़ो
नानी गाय, कबूतर उल्लू
अरे चलाती मैं कम्प्यूटर
मत कहना अब मुझको लल्लू ।

 
ऐसे पड़ गया नाम 'शेख चिल्ली' - भारत-दर्शन संकलन

शेख चिल्ली के अनेक किस्से है। उनका नाम शेख चिल्ली कैसे पड़ा, इसपर भी कई किस्से हैं! उनके नाम के साथ 'चिल्ली' उनके द्वारा 40 दिन तक लगातार प्रार्थना, जिसे 'चिल्ला' कहते हैं, करने के कारण पड़ा, यह भी कहा जाता है। एक और मजेदार किस्सा इस प्रकार है:

 
किस नदी का पानी सबसे अच्छा  - अकबर बीरबल के किस्से

एक बार अकबर ने अपने दरबारियो से पूछा, "बताओ किस नदी का पानी सबसे अच्छा है?"

 
चतुर चित्रकार - रामनरेश त्रिपाठी

चित्रकार सुनसान जगह में बना रहा था चित्र।
इतने ही में वहाँ आ गया यम राजा का मित्र॥

 
पानी और धूप - सुभद्रा कुमारी

अभी अभी थी धूप, बरसने
लगा कहाँ से यह पानी
किसने फोड़ घड़े बादल के
की है इतनी शैतानी।

 
राजा का महल | बाल-कविता  - रबीन्द्रनाथ टैगोर | Rabindranath Tagore

नहीं किसी को पता कहाँ मेरे राजा का राजमहल!
अगर जानते लोग, महल यह टिक पाता क्या एक पल?
इसकी दीवारें चाँदी की, छत सोने की धात की,
पैड़ी-पैड़ी सुंदर सीढ़ी उजले हाथी दाँत की।
इसके सतमहले कोठे पर सूयोरानी का घरबार,
सात-सात राजाओं का धन, जिनका रतन जड़ा गलहार।
महल कहाँ मेरे राजा का, तू सुन ले माँ कान में:
छत के पास जहाँ तुलसी का चौरा बना मकान में!

 
अक़्लमंद हंस - पंचतंत्र

एक बड़े से जंगल में शेर रहता था। शेर गुस्‍से का बहुत तेज था। सभी जानवर उससे बहुत डरते थे। वह सभी जानवरों को परेशान करता था। वह आए दिन जंगलों में पशु-पक्षियों का शिकार करता था। शेर की इन हरकतों से सभी जानवर चिंतित थे।

 
जामुन - श्रीप्रसाद

पौधा तो जामुन का ही था
लेकिन आये आम
पर जब खाया, तब यह पाया
ये तो है बादाम
जब उनको बोया ज़मीन में
पैदा हुए अनार
पकने पर हो गये संतरे
मैंने खाए चार। 

 
प्रकृति विनाशक आखिर क्यों है? - आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)

बिस्तर गोल हुआ सर्दी का,
अब गर्मी की बारी आई।
आसमान से आग बरसती,
त्राहिमाम् दुनियाँ चिल्लाई।

 
बूंदों की चौपाल  - प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ | Prabhudyal Shrivastava

हरे- हरे पत्तों पर बैठे,
हैं मोती के लाल।
बूंदों की चौपाल सजी है,
बूंदों की चौपाल।  

 

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