विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

जीवन में नव रंग भरो

जीवन में नव रंग भरो | त्रिलोक सिंह ठकुरेला की बाल कविता

सीना ताने खड़ा हिमालय,
कहता कभी न झुकना तुम।
झर झर झर झर बहता निर्झर,
कहता कभी न रुकना तुम॥

नीलगगन में उड़ते पक्षी,
कहते नभ को छूलो तुम।
लगनशील को ही फल मिलता,
इतना कभी न भूलो तुम॥

सन सन चलती हवा झूमकर,
कहती 'चलते रहना है।
जीवन सदा संवरता श्रम से,
श्रम जीवन का गहना है॥

प्रकृति सिखाती रहती हर क्षण,
मन में नयी उमंग भरो।
तुम भी उठो , स्वप्न सच कर लो,
जीवन में नव रंग भरो॥

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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