कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।
 
मुक़ाबला (काव्य)       
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

दमदार ने
पूरे दम से
जान लड़ा दी
मंज़िल पाने को,

और...
दुमदार ने केवल दुम हिला दी
मंज़िल हथियाने को।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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