हिंदुस्तान की भाषा हिंदी है और उसका दृश्यरूप या उसकी लिपि सर्वगुणकारी नागरी ही है। - गोपाललाल खत्री।

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नहीं होता मित्र राजधानी में

मित्र
होता है हरदम
लोटे में पानी – चूल्हे में आग
जलन में झमाझम – उदासी में राग

दुर्दिन की थाली में बाड़ी से बटोरी हुई उपेक्षित भाजी-साग
रतौंदी के शिविर में मिले सरकारी चश्मे से
दिख-दिख जाता हरियर बाग

नहीं होता मित्र राजधानी में
...

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