भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।

क्षणिकाएं

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दो क्षणिकाएँ    - मंगलेश डबराल

शब्द

 
हक़ | क्षणिका - सुफला सेठी

रोशनी बेचने का हक़ ,
सबको नहीं मिला करता;
सूरज का मैं ,
नूर-ए-चश्म हो गया हूँ।

 

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