हिंदी हिंद की, हिंदियों की भाषा है। - र. रा. दिवाकर।
जिंदगी की चादर (काव्य)    Print  
Author:अलका सिन्हा
 

जिंदगी को जिया मैंने
इतना चौकस होकर
जैसे कि नींद में भी रहती है सजग
चढ़ती उम्र की लड़की
कि कहीं उसके पैरों से
चादर न उघड़ जाए।

- अलका सिन्हा

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