विदेशी भाषा में शिक्षा होने के कारण हमारी बुद्धि भी विदेशी हो गई है। - माधवराव सप्रे।
 
विष्णु प्रभाकर की कविताएं (काव्य)       
Author:विष्णु प्रभाकर | Vishnu Prabhakar

कहानी, कथा, उपन्यास, यात्रा-संस्मरण, जीवनी, आत्मकथा, रूपक, फीचर, नाटक, एकांकी, समीक्षा, पत्राचार आदि गद्य की सभी संभव विधाओं के लिए प्रसिद्ध विष्णुजी ने कविताएं भी लिखी हैं।

प्रस्तुत है विष्णु प्रभाकर की कविताएं का संकलन।

 

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