वो था सुभाष, वो था सुभाष
वो था सुभाष, वो तो सुभाष - सुभाषचंद्र बोस पर रोहित कुमार हैप्पी की एक देश-भक्ति से ओतप्रोत वीर रस की कविता। A patriotic poem on Netaji Subhash Chandra…
पूरी कविता पढ़ेंसामने आईने के जाओगे
सामने आईने के जाओगे - डॉ राणा प्रतापसिंह ‘राणा' गन्नौरी की ग़ज़ल. Ghazal by Dr Rana Pratap Singh Rana Ganauri
पूरी कविता पढ़ेंघर से निकले ....
घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे - निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल. Ghazal by Nida Fazli.
पूरी कविता पढ़ेंअपना ग़म लेके | ग़ज़ल
अपना ग़म लेके - निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल। Hindi Ghazal by Nida Fazli.
पूरी कविता पढ़ेंनिदा फ़ाज़ली के दोहे
निदा फ़ाज़ली के दोहे - निदा फ़ाज़ली के दोहे। निदा फ़ाज़ली अपने गीतों, ग़ज़लों व शायरी के लिए तो प्रसिद्ध हैं ही, आपके दोहे भी मंत्रमुग्ध कर देते हैं। Hindi …
पूरी कविता पढ़ेंकिस रंग खेलूँ अबके होली
किस रंग खेलूँ अबके होली - विवेक जोशी जोश की होली कविता. Kis Rang Khelun Abke Holi - Holi poem by Vivek Joshi Josh.
पूरी कविता पढ़ेंये सारा जिस्म झुककर
ये सारा जिस्म झुककर - दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल. Hindi Ghazal by Dushyant Kumar.
पूरी कविता पढ़ेंबेधड़क दोहावली
हास्य दोहे - बेधड़क बनारसी की दोहावली. Hasya Dohe by Bedhadhak Banarsi.
पूरी कविता पढ़ेंढोल, गंवार...
ढोल, गंवार... सुरेन्द्र शर्मा की हास्य कविता. Hasya Kavita by Surendra Sharma.
पूरी कविता पढ़ेंप्रयोगवाद
प्रयोगवाद - दिनेश कुमार गोयल की हास्य कविता. Hindi Hasya poem by Dinesh Kumar Goyal
पूरी कविता पढ़ेंमसख़रा मशहूर है... | हज़ल
हुल्लड़ मुरादाबादी की हज़ल। Hindi Hazal by by Hullad Muradabadi.
पूरी कविता पढ़ेंरे रंग डारि दियो राधा पर
रे रंग डारि दियो राधा पर - शिवदीन राम का होली भजन. Holi Bhajan by Shivdeen Ram.
पूरी कविता पढ़ेंमोहन खेल रहे है होरी
मोहन खेल रहे है होरी - शिवदीन राम का होली भजन. Holi Bhajan by Shivdin Ram.
पूरी कविता पढ़ेंहोली है आख़िर..
होली है आख़िर मनाना पड़ेगा - राजेन्द्र प्रसाद की हास्य-रचना. Hindi Hazal on Holi by Rajendra Prasad.
पूरी कविता पढ़ेंहिन्दी भाषा
हिन्दी भाषा - अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' छ्प्पै. Hindi Bhasha -Chppai by Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh
पूरी कविता पढ़ेंसत्य की महिमा - कबीर की वाणी
सत्य की महिमा - कबीर की वाणी। Satya par Kabir ke Dohe - Kabir Vani
पूरी कविता पढ़ेंलंच! प्रपंच!!
लंच! प्रपंच!! मधुप पांडेय की हास्य कविता. Hindi poem by Madhup Pandey.
पूरी कविता पढ़ेंजनतंत्र का जन्म
जनतंत्र का जन्म - रामधारीसिंह दिनकर का गीत. Hindi Geet by Ramdhari Singh Dinkar
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