भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है। - टी. माधवराव।

अब के सावन में

अब के सावन में | Hindi Ghazal by Neeraj

अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई
मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई

आप मत पूछिए क्या हम पे सफ़र में गुजरी
था लुटेरों का जहाँ गाँव, वहाँ रात हुई

ज़िंदगी-भर तो हुई गुफ़्तगू ग़ैरों से मगर
आज तक हमसे हमारी न मुलाक़ात हुई

हर ग़लत मोड़ पे टोका है किसी ने मुझको
एक आवाज़ तेरी जब से मेरे साथ हुई

मैंने सोचा कि मेरे देश की हालत क्या है
एक कातिल से तभी मेरी मुलाक़ात हुई

-नीरज
[हिंदी ग़ज़ल शतक, किताबघर प्रकाशन]

 

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