साहित्य का स्रोत जनता का जीवन है। - गणेशशंकर विद्यार्थी।

गोरख पांडेय की दो कविताएं (काव्य)

Print this

Author: गोरख पांडेय

आँखें देखकर

ये आँखें हैं तुम्हारी
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुन्दर
इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए।

#

उनका डर

वे डरते हैं किस चीज से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत गोला-बारूद पुलिस - फ़ौज के बावजूद ?
वे डरते हैं कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना
बंद कर देंगे।

- गोरख पांडेय

Back

 
Post Comment
 
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें