गाथा | कविता

रचनाकार: डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा 'अदिति'

डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा अदिति

है व्यथित हृदय पीड़ित मेरा
कुछ छूट रहा ज्यों हाथों से
आशा बन्धन सब टूट रहे
धागे कोमल जज़्बातों से

आंखें जब से तुमने फेरीं
संबंधों का विच्छेद किया
क्यों प्रेम डोर काटी तुमने
हिय खंजर से क्यों भेद दिया?
सब प्रेम दीप बुझते जाते
क्यों क्रोध के झंझावातों से
है व्यथित हृदय पीड़ित मेरा
कुछ छूट रहा ज्यों हाथों से

तुमसे केवल उम्मीद मुझे
थी कुछ मीठे अल्फ़ाज़ों की
माधुर्य पूर्ण मीठी वाणी
कुछ प्रेमपूर्ण अहसासों की
मेरे प्रियवर तुम रूठ गए
बरसे अश्रु बरसातों से
है व्यथित हृदय पीड़ित मेरा
कुछ छूट रहा ज्यों हाथों से

थे सराबोर कदाचित जो
दो नेहयुक्त नयनाभिराम
थे नयन मेरे मदिरा प्याले
अब हाथों में पकड़े हो जाम
अब क्यों बरसाते हो प्रियवर!
यूं तिक्त बाण अंगारों से
है व्यथित हृदय पीड़ित मेरा
कुछ छूट रहा ज्यों हाथों से

डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा "अदिति"