राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Hindi Poems & Poetry - हिंदी कविता संकलन


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  1. ये जो शहतीर है | ग़ज़ल

    ये जो शहतीर है- दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल। इसी ग़ज़ल का एक प्रसिद्ध शेर है - कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस शेर क…

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  2. प्रेम देश का... | ग़ज़ल 

    प्रेम देश का ढूंढ रहे हो गद्दारों के बीच - डॉ राणा प्रताप सिंह 'राणा' गन्नौरी की ग़ज़ल। Hindi Ghazal by Dr Rana Pratap Singh Rana Ganauri.

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  3. सामने आईने के जाओगे

    सामने आईने के जाओगे - डॉ राणा प्रतापसिंह ‘राणा' गन्नौरी की ग़ज़ल. Ghazal by Dr Rana Pratap Singh Rana Ganauri

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  4. डॉ सुधेश की ग़ज़लें

    डॉ सुधेश दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिन्दी के प्रोफ़ेसर पद से सेवानिवृत्त हैं। आप हिंदी में विभिन्न विधाओ में सृजन करते हैं। यहाँ आपकी…

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