राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

बड़ी नाज़ुक है डोरी | ग़ज़ल 

ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Dr Rana Pratap Singh Rana

बड़ी नाज़ुक है डोरी साँस की यह 
कहीं टूटी तो बाकी क्या रहेगा

रखो तुम बंद चाहे अपनी घड़ियां
समय तो रात दिन चलता रहेगा

न जाने क्यों हमें यह लग रहा है
हमारे बाद सन्नाटा रहेगा

वृथा है आज, कल की फिक्र 'राणा'
जो कुछ होना है वह होता रहेगा

-डॉ राणा प्रताप सिंह 'राणा' गन्नौरी 

 

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