अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

भूल कर भी न बुरा करना | ग़ज़ल

भूल कर भी न बुरा करना | ग़ज़ल | डा राणा प्रताप सिंह राणा गन्नौरी

भूल कर भी न बुरा करना
जिस क़दर हो सके भला करना।

सीखना हो तो शमअ़ से सीखो
दूसरों के लिए जला करना।

रह के तूफ़ां में हम ने सीखा है
तेज़ लहरों का सामना करना।

भूल कर ही सही कभी 'राणा'
याद हम को भी कर लिया करना।

- डा राणा प्रताप सिंह राणा गन्नौरी

 

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