भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

अब अँधेरों से लिपटकर | ग़ज़ल

अब अँधेरों से लिपटकर - ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Dr Bhawana Kunwar

अब अँधेरों से लिपटकर यूँ ना रोया कीजिए
हो घड़ी भर के लिए पर, कुछ तो सोया कीजिए

बन्द रहने दो ये आँसू,अपने दिल की सीप में
कीमती मोती हैं ये, इनको ना खोया कीजिए

यूँ सफर ये जिंदगी का,है बहुत मुश्किल मगर
साथ में मिल के जिए जो, पल सँजोया कीजिए

बंद आँखों में सजे, सपनों के हैं बादल घने
आँसुओं की धार से, उनको ना धोया कीजिए

उग रही हो पौध जब आँतक की ही हर तरफ़
उस जमी पर प्यार के कुछ, बीज बोया कीजिए

-डॉ० भावना कुँअर
 सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)

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