समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

बकरी  (काव्य)

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Author: हलीम आईना

आदर्शों के 
मेमनों की
बलि

सारे-आम 
हो 
रही है,

तभी तो--
गाँधी जी की 
बकरी 

सुबक-सुबक कर 
रो
रही है। 

- हलीम आईना

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