दिविक रमेश साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 20
सोचेगी कभी भाषा
जिसे रौंदा है जब चाहा तब
जिसका किया है दुरूपयोग, सबसे ज़्यादा।
जब चाहा तब
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जिसका किया है दुरूपयोग, सबसे ज़्यादा।
जब चाहा तब
जिद्दी मक्खी
कितनी जिद्दी हो तुम मक्खी
अभी उड़ाती फिर आ जाती!
हां मैं भी करती हूं लेकिन
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अभी उड़ाती फिर आ जाती!
हां मैं भी करती हूं लेकिन
जब बांधूंगा उनको राखी
माँ मुझको अच्छा लगता जब
मुझे बांधती दीदी राखी
तुम कहती जो रक्षा करता
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मुझे बांधती दीदी राखी
तुम कहती जो रक्षा करता
शब्द शब्द जैसे हों फूल
अच्छी पुस्तक बगिया जैसी
होती है मुझको तो लगता।
कविता और कहानी उसमें
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होती है मुझको तो लगता।
कविता और कहानी उसमें
आओ चलें घूम लें हम भी
छुट्टियों के आने से पहले
हम तो लगते खूब झूमने।
कह देते मम्मी-पापा से
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हम तो लगते खूब झूमने।
कह देते मम्मी-पापा से
खेल महीनों का | बाल कविता
अच्छी लगती हमें जनवरी
नया वर्ष लेकर है आती।
ज़रा बताओ हमें फरवरी
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नया वर्ष लेकर है आती।
ज़रा बताओ हमें फरवरी
डर भी पर लगता तो है न | बाल कविता
चटख मसाले और अचार
कितना मुझको इनसे प्यार!
नहीं कराओ इनकी याद
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कितना मुझको इनसे प्यार!
नहीं कराओ इनकी याद
कितना अच्छा होता न तब | बाल कविता
सब कहीं ले जा सकते हम!
कितना अच्छा होता न तब?
और समुद्र सिर पर ढ़ोकर
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कितना अच्छा होता न तब?
और समुद्र सिर पर ढ़ोकर
मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती | बाल कविता
कभी कभी मन में आता है
क्यों माँ दीदी को ही कहती
साग बनाओ, रोटी पोओ ?
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क्यों माँ दीदी को ही कहती
साग बनाओ, रोटी पोओ ?
दीदी को बतलाऊंगी मैं | बाल कविता
बड़ी हो गई अब यह छोड़ो
नानी गाय, कबूतर उल्लू
अरे चलाती मैं कम्प्यूटर
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नानी गाय, कबूतर उल्लू
अरे चलाती मैं कम्प्यूटर