विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती | बाल कविता

रचनाकार: दिविक रमेश
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मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती | Divik Ramesh

कभी कभी मन में आता है
क्यों माँ दीदी को ही कहती
साग बनाओ, रोटी पोओ ?

कभी कभी मन में आता हॆ
क्यों माँ दीदी को ही कहती
कपड़े धोलो, झाड़ू दे लो ?

कभी कभी मन में आता हॆ
क्या मैं सीख नहीं सकता हूं
साग बनाना, रोटी पोना?

कभी कभी मन में आता है
क्या मैं सीख नहीं सकता हूँ
कपड़े धोना, झाडू देना ?

मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती
क्यों माँ चाहती दीदी ही पर
काम करे बस घर के सारे?

कभी कभी मन में आता हॆ
थक जाती होगी ना दीदी
क्यों ना काम करें हम मिलकर?

-दिविक रमेश

 

[Children's Hindi Poems by Divik Ramesh]

 

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