देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती | बाल कविता
कभी कभी मन में आता है
क्यों माँ दीदी को ही कहती
साग बनाओ, रोटी पोओ ?
कभी कभी मन में आता हॆ
क्यों माँ दीदी को ही कहती
कपड़े धोलो, झाड़ू दे लो ?
कभी कभी मन में आता हॆ
क्या मैं सीख नहीं सकता हूं
साग बनाना, रोटी पोना?
कभी कभी मन में आता है
क्या मैं सीख नहीं सकता हूँ
कपड़े धोना, झाडू देना ?
मैं पढ़ता दीदी भी पढ़ती
क्यों माँ चाहती दीदी ही पर
काम करे बस घर के सारे?
कभी कभी मन में आता हॆ
थक जाती होगी ना दीदी
क्यों ना काम करें हम मिलकर?
-दिविक रमेश
[Children's Hindi Poems by Divik Ramesh]
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