अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

शब्द शब्द जैसे हों फूल

रचनाकार: दिविक रमेश
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शब्द शब्द जैसे हों फूल | दिविक रमेश

अच्छी पुस्तक बगिया जैसी
होती है मुझको तो लगता।
कविता और कहानी उसमें
हों पौधे ज्यों ऐसा लगता।

वाक्य लगते ज्यों टहनियां
शब्द शब्द जैसे हों फूल।
और अर्थ लगें ज्यों खुशबू
सूंघ सूंघ मन जाता झूल।

अरे कहानी में गंदे जो
वे तो लगते बिलकुल शूल।
उनको तो पढ़ते ही लगता
भैया जाएं जल्दी भूल।

-दिविक रमेश

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