
किआ ओरा मोदी - प्रधानमंत्री मोदी ने ऑकलैंड में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया
11-07-2026 (ऑकलैंड): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ऑकलैंड में आयोजित "किआ ओरा मोदी" कार्यक्रम में न्यूज़ीलैंड में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की विशाल सभा को संबोधित किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की चार दशकों में पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा है। कार्यक्रम में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन विशेष रूप से उपस्थित रहे। लगभग 10,000 भारतीय प्रवासियों की सभा में उत्साह का माहौल रहा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत माओरी अभिवादन "किआ ओरा" से की और कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर वे न्यूज़ीलैंड पहुंचे हैं। उन्होंने एक व्यक्तिगत प्रसंग साझा करते हुए बताया कि 25-30 साल पहले, जब वे किसी सरकार का हिस्सा नहीं थे, तब भी उन्हें न्यूज़ीलैंड आने का अवसर मिला था और उस समय स्थानीय साथी से मिला एक मफलर वे आज भी संभालकर रखे हुए हैं। इस बार भी वे इसे विशेष रूप से अपने साथ लेकर आए।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को न्यूज़ीलैंड की सांस्कृतिक परंपरा "वाका" (नाव) के प्रतीक से जोड़ते हुए कहा कि यह शब्द सदियों से साझा यात्रा का प्रतीक रहा है और आज भारत-न्यूज़ीलैंड की यह "वाका" एक नई यात्रा पर निकलने को तैयार है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की सफलता का भरोसा उन्हें इसलिए है क्योंकि इसके असली नाविक स्वयं भारतीय समुदाय के लोग हैं, जो ऑकलैंड से वेलिंगटन और क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार और लेबर पार्टी के सदस्यों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों को मिले व्यापक द्विदलीय समर्थन को दर्शाता है। उन्होंने कीवी-भारतीय समुदाय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था और समाज में नए रंग भर रहा है — चाहे वह एयर न्यूज़ीलैंड के सीईओ निखिल रविशंकर हों, पूर्व गवर्नर जनरल आनंद सत्यानंद हों, या क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूज़ीलैंड की सड़कों के खंडाला, बॉम्बे हिल्स, कोरोमंडल, कलकत्ता स्ट्रीट और दिल्ली क्रिसेंट जैसे भारतीय नाम मौजूद हैं।
भाषण में प्रधानमंत्री ने माओरी संस्कृति और भारतीय परंपराओं के बीच गहरी समानताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाका में उन्होंने केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक समाज की आत्मा — साहस, आत्मसम्मान और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा — देखी है। उन्होंने माओरी शब्द "मनाकितांगा" (सम्मान व अपनापन) की तुलना भारत के "अतिथि देवो भवः" से, "फानो" (कुटुंब) की तुलना भारतीय पारिवारिक मूल्यों से, और "कएतियाकितांगा/" (प्रकृति का संरक्षण) की तुलना "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः" के भाव से की। उन्होंने कहा कि शब्द, भाषा और पहनावा भले अलग हों, भावना एक ही है।
आर्थिक व क्षेत्रीय सहयोग पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूज़ीलैंड का कृषि क्षेत्र — विशेष रूप से ज़ेस्प्री मॉडल, ट्रेसेबिलिटी और फूड सेफ्टी सिस्टम — भारत जैसे छोटे किसानों वाले बड़े कृषि देश के लिए बड़ी सीख है। उन्होंने मानुका हनी का उल्लेख करते हुए भारत के बी-कीपिंग मिशन की चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत-न्यूज़ीलैंड खेल संबंधों के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं — सौ साल पहले मेजर ध्यानचंद की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम की न्यूज़ीलैंड यात्रा से इसकी शुरुआत हुई थी। रग्बी में सहयोग और हाल ही में भुवनेश्वर में हुए न्यूज़ीलैंड रग्बी व रग्बी इंडिया के संयुक्त कोचिंग कार्यक्रम का भी उन्होंने जिक्र किया। स्पेस सेक्टर में सहयोग पर उन्होंने कहा कि चंद्रयान की सफलता में न्यूज़ीलैंड की स्पेस तकनीक का भी योगदान रहा है।
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत-न्यूज़ीलैंड व्यापार समझौता दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा और विकसित भारत की यात्रा को गति देगा।
संबोधन में प्रधानमंत्री ने सिख समुदाय से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान में संकट के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों को सम्मानपूर्वक भारत लाया गया था, श्री हरमंदिर साहिब में सेवा से जुड़ी FCRA संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया, और श्री हेमकुंड साहिब जी तक रोपवे का निर्माण कराया जा रहा है ताकि बुजुर्ग व सिख श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा हो। उन्होंने यह भी बताया कि साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में हर वर्ष 26 दिसंबर को "वीर बाल दिवस" मनाया जाता है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के परिवार द्वारा 300 वर्षों से संरक्षित श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के पवित्र "जोड़े साहब" को अब श्री पटना साहिब में सिख संगत के दर्शनार्थ रखे जाने की जानकारी भी उन्होंने साझा की।
भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने भारत की हालिया आर्थिक उपलब्धियों की एक विस्तृत सूची प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक और दूध उत्पादक है, दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता, टेलीकॉम बाजार, गेहूं उत्पादक व मछली उत्पादक है, और तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार व स्टार्टअप इकोसिस्टम है। उन्होंने बताया कि भारत जल्द ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक बनने जा रहा है, और UPI के जरिए हर महीने अरबों डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं, जिसमें दुनिया के दर्जनों देश रुचि दिखा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने भारतीय डायस्पोरा के बच्चों के लिए चलाए जा रहे "भारत को जानो क्विज़" के अगले संस्करण को और हाईटेक बनाए जाने की जानकारी देते हुए युवाओं से इसमें भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस बार भारतीय प्रधानमंत्री को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे, लेकिन अब इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री लक्सन, उनकी टीम और न्यूज़ीलैंड की जनता का आभार व्यक्त किया और "भारत माता की जय" तथा "वंदे मातरम्" के उद्घोष के साथ अपनी बात समाप्त की।
[भारत-दर्शन समाचार]
* प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ऑकलैंड में दिया गया पूरा भाषण भारत-दर्शन अभिलेखागार में पढ़ें
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