भारत ऑस्ट्रेलियाई प्रथम राष्ट्र (फर्स्ट नेशंस) पूर्वज के अवशेष लौटाएगा और ऑस्ट्रेलिया भारत की कई सांस्कृतिक महत्व की वस्तुएँ
ऑस्ट्रेलिया (10 जुलाई 2026) : ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भारत के साथ अपने मजबूत संबंधों और आपसी जन-संपर्क को आगे बढ़ाते हुए सांस्कृतिक सहयोग को और गहरा करने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में रखे एक ऑस्ट्रेलियाई प्रथम राष्ट्र (फर्स्ट नेशंस) पूर्वज के अवशेष को स्वदेश वापस भेजे जाने की प्रक्रिया में हुई प्रगति का स्वागत किया है। भारत इस पूर्वज के अवशेष को स्वेच्छा और बिना किसी शर्त के उनके पारंपरिक संरक्षकों (ट्रेडिशनल कस्टोडियन्स) को वापस सौंपेगा।
पूर्वजों के अवशेषों को उनके पारंपरिक संरक्षकों को लौटाना फर्स्ट नेशंस समुदाय के लिए एक प्राथमिकता है और इसे सरकारों द्वारा किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण और सम्मानजनक कार्यों में गिना जाता है। भारत की इस वापसी पर सहमति दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक रिश्ते और आपसी सम्मान को दर्शाती है।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री अल्बानीज़ ने ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के संग्रह में पहले रखी गई कई सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं को भारत को स्वेच्छा से वापस लौटाए जाने की भी घोषणा की।
इन वस्तुओं की स्वैच्छिक वापसी, नैतिक संग्रहण और सर्वश्रेष्ठ संग्रहण प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बने रहने की ऑस्ट्रेलिया की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के बयान
"ऑस्ट्रेलिया और भारत का साझा इतिहास गहरा है, और हम दोनों देशों के बीच मजबूत जन-संपर्क का निर्माण कर रहे हैं।
"फर्स्ट नेशंस पूर्वजों की स्वदेश वापसी उपचार, न्याय और मेल-मिलाप को बढ़ावा देती है।
"मैं ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस पूर्वजों को उनके पारंपरिक संरक्षकों को वापस लौटाने के फैसले के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करता हूं।"
कला मंत्री टोनी बर्क का बयान
"पूर्वजों की स्वदेश वापसी और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं की स्वैच्छिक वापसी, दोनों ही ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच साझा मूल्यों के उदाहरण हैं।"
स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई मामलों की मंत्री मलार्न्डिरी मैककार्थी के बयान
"विदेश से पूर्वजों की हर स्वदेश वापसी सच्चाई बयां करने और अतीत की गलतियों को सुधारने का एक कदम है।
"मैं भारत के इस प्रयास का स्वागत करती हूं, क्योंकि हम फर्स्ट नेशंस पूर्वजों को उनकी मातृभूमि और उनके परिजनों तक वापस पहुंचाने के अपने प्रयास जारी रखे हुए हैं।"
[भारत-दर्शन समाचार]
*संपादक की टिप्पणी
ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस (Australian First Nations) ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी और मूल निवासी समुदायों को कहा जाता है, जो हज़ारों वर्षों से इस महाद्वीप पर रहते आए हैं। इसमें मुख्य रूप से दो समूह शामिल हैं:
एबोरिजिनल ऑस्ट्रेलियाई (Aboriginal Australians) — ऑस्ट्रेलियाई मुख्य भूमि और तस्मानिया के मूल निवासी, जिनका इतिहास 60,000 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। ये दुनिया की सबसे पुरानी जीवित संस्कृतियों में से एक हैं।
टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर्स (Torres Strait Islanders) — ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी छोर और पापुआ न्यू गिनी के बीच स्थित टोरेस जलडमरूमध्य के द्वीपों के मूल निवासी, जिनकी अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं हैं।
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
ऑस्ट्रेलिया में फर्स्ट नेशंस समुदायों की सैकड़ों अलग-अलग भाषाई और सांस्कृतिक समूह हैं, हर एक की अपनी भाषा, परंपराएं और भूमि से जुड़ाव है।
यूरोपीय उपनिवेशवाद (18वीं सदी के अंत से) के दौरान इन समुदायों को अपनी ज़मीन, संस्कृति और अक्सर अपने पूर्वजों के अवशेषों से भी वंचित होना पड़ा — कई मानव अवशेष और सांस्कृतिक वस्तुएं उस दौर में विदेशी संग्रहालयों और संग्रहों में पहुंच गईं।
"पारंपरिक संरक्षक" (Traditional Custodians) शब्द का प्रयोग उन समुदायों के लिए किया जाता है जिनका किसी विशेष भूमि या सांस्कृतिक धरोहर से पीढ़ी-दर-पीढ़ी गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है।
हाल के दशकों में ऑस्ट्रेलिया सरकार और वहां के संग्रहालयों ने दुनिया भर से पूर्वजों के अवशेष और सांस्कृतिक वस्तुएं वापस लाने (repatriation) की दिशा में प्रयास तेज़ किए हैं, ताकि इतिहास में हुए अन्याय को सुधारा जा सके और समुदायों के साथ मेल-मिलाप हो सके।
इसी संदर्भ में भारत द्वारा एक फर्स्ट नेशंस पूर्वज के अवशेष को स्वदेश वापस भेजने का यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सम्मान और सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।

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