डॉ रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 22
फिल्म
फिल्म चल रही थी। जो व्यक्ति अभिनय कर रहा था, न भाव उसके थे, न स्वर और संगीत, यहाँ तक कि फिल्म की पटकथा और संवाद भी किसी और के लिखे हुए थे तथा उसे निर्देशित भी क...
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इतिहास गवाह है
उसकी निगाह अलमारी पर गई, तो देखा, रवि ने उसकी सारी किताबों तथा कई दूसरी ज़रूरी चीजों को, बेतरह एक ओर खिसका कर, वहां अपना बस्ता जँचा दिया है। उसे बच्चे की इस ह...
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परिचित | लघुकथा
बस में छूट जाने के कारण, पुलिस ने उसका सामान, अपने कब्ज़े में ले लिया था। अब, किसी परिचित आदमी की ज़मानत के बाद ही, वह सामान उसे मिल सकता था।
“मेरी पत्नी सख?...
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“मेरी पत्नी सख?...
जीवन-रेखा
छुट्टियाँ बिताकर, चलते समय उसने, बैठक की ड्योढ़ी पर गुमसुम बैठे काका के चरण छुए, तो काका ने, आशीर्वाद के लिए अपना हाथ, उसके सिर पर रख दिया-“आच्छ्यो बेट्टा !...
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सांप
तड़ातड़ तीन लाठियाँ पड़ीं, सांप तड़फकर वहीं ढेर हो गया।
एक बोला—“मैंने ऐसे जमा कर लाठी मारी थी कि टिकते ही सांप के प्राण निकल गए।”
“तुम्हारी लाठी ठ?...
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एक बोला—“मैंने ऐसे जमा कर लाठी मारी थी कि टिकते ही सांप के प्राण निकल गए।”
“तुम्हारी लाठी ठ?...
हत्या
चौराहे पर चर्चा चल रही थी। पूर्णिमा-हत्याकांड के सभी आरोपी बरी हो गये लेकिन प्रश्न था कि जब पूर्व-आरोपियों ने उसे नहीं मारा, तो फिर मारा किसने?
इस गंभीर प्?...
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इस गंभीर प्?...
कोरोना पर दोहे
गली-मुहल्ले चुप सभी, घर-दरवाजे बन्द।
कोरोना का भूत ही, घुम रहा स्वच्छन्द॥
लावारिस लाशें कहीं और कहीं ताबूत।
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कोरोना का भूत ही, घुम रहा स्वच्छन्द॥
लावारिस लाशें कहीं और कहीं ताबूत।
पत्नी का भविष्य | लघुकथा
पति ने नववर्ष पर ‘हिन्दुस्तान’ में अपना वार्षिक भविष्य-फल देखने के बाद पत्नी से पूछा-"तुम्हारी राशि क्या है?"
"तुला, क्यों ?"
"तुम्हारा वार्षिक भविष्य दे?...
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"तुला, क्यों ?"
"तुम्हारा वार्षिक भविष्य दे?...
डॉ. रामनिवास मानव के दोहे
डॉ. 'मानव' दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। उनके कुछ दोहे यहां दिए जा रहे हैं:
1
य...
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डा रामनिवास मानव की लघुकथाएं
डॉ० 'मानव' लघुकथा के अतिरिक्त दोहा, बालकाव्य, हाइकु इत्यादि विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं। उनकी कुछ लघु-कथाएं यहाँ संकलित की जा रही हैं। पढ?...
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डॉ रामनिवास मानव के हाइकु
डॉ. 'मानव' हाइकु, दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। उनके कुछ हाइकु यहाँ दिए जा रह...
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पत्रकारिता : तब और अब | डॉ रामनिवास मानव के दोहे
पत्रकारिता थी कभी, सचमुच मिशन पुनीत।
त्याग तपस्या से भरा, इसका सकल अतीत।।
बालमुकुन्द, विद्यार्थी, लगते सभी अनन्य।
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त्याग तपस्या से भरा, इसका सकल अतीत।।
बालमुकुन्द, विद्यार्थी, लगते सभी अनन्य।
नियति
चक्की के पाट का चनों के प्रति व्यवहार बड़ा निर्मम था। अतः एक दिन कुछ चनों ने मिलकर उसे फोड़ दिया। चने चाहते थे कि पाट ऐसा हो, जो उनके दर्द को समझे और उनकी भा...
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गांव पर हाइकु
डॉ. 'मानव' हाइकु, दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। गांव पर लिखे उनके कुछ हाइक?...
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