यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

चिड़िया रानी

रचनाकार: डॉ रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav
रेटिंग: 0/5 (0 मत)

चिड़िया रानी | बाल कविता | डा रामनिवास मानव | बाल साहित्य | बाल कविताएं | Childrens Hindi Literature

सदा फुदकती, कभी न थकती,
गाती मीठी-मीठी बानी।
कैसे खुश रहती हो इतना,
सच-सच कहना चिड़िया रानी।

ताज़ा दाना, निर्मल पानी,
शुद्ध हवा औ' धूप सुहानी।
यही राज सारी खुशियों का,
बोली हंसकर चिड़िया रानी।

खुले जगत् में जीना सीखो,
ताज़ा हो सब दानी-पानी।
इतना कहकर, फुदक ज़रा-सा,
फुर्र हो गई चिड़िया रानी।

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।