🌟 संपादक की पसंद व्यंग्य क्षणिकाएँ
मिश्रीलाल जायसवाल की व्यंग्य क्षणिकाएँ।
कविता पढ़ेंमिश्रीलाल जायसवाल की व्यंग्य क्षणिकाएँ।
कविता पढ़ेंबैताल-माणिक वर्मा की व्यंग्य कविता। Baital-a satirical poem by Manik Verma.
कविता पढ़ेंलेबर चौक-डॉ पवन कुमार जैन 'प्रबल' की कविता। Labour Chowk - Poem by Dr Pawan Kumar Jain 'Prabal'.
कविता पढ़ेंप्रजातंत्र में कबूतर - राजेश्वर वशिष्ठ की कविता।
कविता पढ़ेंहास्य-व्यंग्य से भरपूर काका हाथरसी के दोहे। Humorous and satirical Hindi dohas (couplets) by the legendary Kaka Hathrasi.
कविता पढ़ेंदुष्यंत कुमार की दो ग़ज़लें।
कविता पढ़ेंकविता और पाठक-आराधना झा श्रीवास्तव की कविता।
कविता पढ़ेंमकान और लड़के-लड़कियाँ-डॉ वंदना मुकेश की कविता।
कविता पढ़ेंडॉ उपासना दीक्षित की दो कविताएं।
कविता पढ़ेंदीवाली-तरिंदर कौर की कविता।
कविता पढ़ेंतू स्वामिनी मैं चेरी-डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा ‘अदिति’ की कविता।
कविता पढ़ेंदूसरा रूप - सफ़िया हयात की कविता।
कविता पढ़ेंशायद मैं एक बुरी औरत हूँ-रमिंदर रम्मी की कविता।
कविता पढ़ेंट्रैफिक जाम का पुराण-प्रीति ढींगरा की कविता।
कविता पढ़ेंगाँव से मॉल तक का सफ़र - गगन संधू की कविता।
कविता पढ़ेंगणतंत्र-अमरजीत कसक की कविता।
कविता पढ़ेंहिन्दी-हत्या - अरुण जैमिनी की व्यंग्य कविता।
कविता पढ़ेंविचित्र विवशता-मधुप पांडेय की हास्य-व्यंग्य कविता।
कविता पढ़ेंहवाई कवि-सम्मेलन - पं० हरिशंकर शर्मा की हास्य-व्यंग्य रचना।
कविता पढ़ेंइधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं-ओम प्रकाश 'आदित्य' व्यंग्य की एक कालजयी कृति मानी जाती है।
कविता पढ़ेंमोचीराम-सुदामा पांडेय धूमिल की कविता।
कविता पढ़ेंरामदास-रघुवीर सहाय की मध्यमवर्गीय जीवन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विडम्बनाओं पर गहरा व्यंग्य करती कविता।
कविता पढ़ेंसाँप-अज्ञेय ने अपनी प्रसिद्ध लघु कविता के माध्यम से शहरी सभ्यता और आधुनिकता पर बहुत सटीक व्यंग्य किया है।
कविता पढ़ेंशासन की बंदूक - नागार्जुन की रचना। नागार्जुन की यह कविता मारक क्षमता व तीखे व्यंग्य के लिए जानी जाती है। यह आपातकाल के दौरान और सत्ता की निरंकुशता पर …
कविता पढ़ेंइस शहर की सभ्यता हद है | प्रदीप चौबे की हज़ल।
कविता पढ़ेंनिराला के प्रति - हिंदी के स्थान पर हिन्दुस्तानी में कविता लिखने पर निराला को अपना आक्रोश जताने के लिए लिखी गई एक कविता।
कविता पढ़ेंउलाहना - गंगाप्रसाद पाण्डेय का गीत।
कविता पढ़ेंहोली में - रमानाथ अवस्थी का गीत।
कविता पढ़ेंबेढब बनारसी की दोहावली।
कविता पढ़ेंसमाज, व्यवस्था और शासन पर कटाक्ष करती भारतेंदु हरिश्चंद्र की मुकरियाँ।
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