प्रीता व्यास | न्यूज़ीलैंड साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 14
सहेजे हैं शब्द
शौकिया जैसे सहेजते हैं लोग
रंगीन, सुंदर, मृत तितलियाँ
सहेजे हैं वैसे ही मैंने
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रंगीन, सुंदर, मृत तितलियाँ
सहेजे हैं वैसे ही मैंने
मुझे देखा ही नहीं
देखतीं है आँखें बहुत कुछ
ज़मीं, आसमान, सड़कें, पुल, मकान
पेड़, पौधे, इंसान
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ज़मीं, आसमान, सड़कें, पुल, मकान
पेड़, पौधे, इंसान
हममें फ़र्क़ है
तुम्हारा नजरिया भले ही समान हो
मेरे और अख़बार के प्रति,
मगर हममें फ़र्क़ है
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मेरे और अख़बार के प्रति,
मगर हममें फ़र्क़ है
दादी कहती दाँत में | बाल कविता
दादी कहती दाँत में मंजन नित कर नित कर नित कर
साफ़-सफाई दाँत जीभ की नितकर नित कर नित कर।
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साफ़-सफाई दाँत जीभ की नितकर नित कर नित कर।
तुझे पाती हूं तो जी जाती हूं
बादल ही क्यों ना फट जाएँ
तेरे पीछे मे रोती भी नहीं
मेरे आंसुओं को भी
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तेरे पीछे मे रोती भी नहीं
मेरे आंसुओं को भी
बुद्धू बेलोग
बात काफी पुराने समय की है जब न टीवी थी ना रेडिओ, ना इंटरनेट ना फोन. इंडोनेशिया के द्वीप बाली में एक सीधा-साधा सा लड़का अपनी माँ के साथ रहा करता था। वो इतना सी...
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काबायान अमीर न बन सका
काबायान एक गरीब आदमी था। उसकी जीविका 'रोज़ कुंवा खोदो, रोज़ पानी पीओ' वाले ढर्रे पर चल रही थी। दुनिया के तमाम लोगों की तरह वह भी अमीर होने का सपना देखता था।
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