वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

पुर तानह लौट यानि तानह लौट मंदिर

पुर तानह लौट यानि तानह लौट मंदिर

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।