अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

मैं कवि हूँ

मैं कवि हूँ | Hindi poem by Preeta Vyas

मैं डॉक्टर नहीं हूँ
मैं तुम्हारी बीमारी के लिए
दवा नहीं दे सकती
तुम्हारी कमज़ोरी के लिए
टॉनिक नहीं दे सकती
मैं कवि हूँ
मैं सिर्फ दे सकती हूँ तुम्हें
दिल की गहराई से निकली कविता 
इसे रख लो
शायद फ़र्क़ पड़े
शायद ढाढस मिले
कभी-कभी
शब्द चमत्कार कर जाते हैं।

-प्रीता व्यास

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