हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

हाथी चल्लम-चल्लम (बाल-साहित्य )

Print this

Author: श्रीप्रसाद

हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम
हम बैठे हाथी पर, हाथी हल्लम हल्लम

लंबी लंबी सूँड़ फटाफट फट्टर फट्टर
लंबे लंबे दाँत खटाखट खट्टर खट्टर

भारी भारी मूँड़ मटकता झम्मम झम्मम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

पर्वत जैसी देह थुलथुली थल्लल थल्लल
हालर हालर देह हिले जब हाथी चल्लल

खंभे जैसे पाँव धपाधप पड़ते धम्मम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

हाथी जैसी नहीं सवारी अग्गड़ बग्गड़
पीलवान पुच्छन बैठा है बाँधे पग्गड़

बैठे बच्चे बीस सभी हम डग्गम डग्गम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

दिनभर घूमेंगे हाथी पर हल्लर हल्लर
हाथी दादा जरा नाच दो थल्लर थल्लर

अरे नहीं हम गिर जाएँगे घम्मम घम्मम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

--श्रीप्रसाद

Back

 
Post Comment
 
 
 
 
 

भारत-दर्शन रोजाना

Bharat-Darshan Rozana

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें