रोहित कुमार 'हैप्पी' (न्यूज़ीलैंड) साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 188
न्यू मीडिया
न्यू मीडिया वास्तव में परम्परागत मीडिया का संशोधित रूप है जिसमें तकनीकी क्रांतिकारी परिवर्तन व इसका नया रूप सम्मिलित है। आइए, हिंदी न्यू मीडिया के स्व?...
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दोराहा | Doraha
मैं दोराहे के बीच खड़ा था और वे दोनों मुझे डसने को तैयार थे। एक तरफ सांप था और दूसरी तरफ आदमी।
मैंने ज्यादा विचारना उचित नहीं समझा। सोचा सांप शायद जहरीला ?...
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मैंने ज्यादा विचारना उचित नहीं समझा। सोचा सांप शायद जहरीला ?...
हमने कलम उठा नहीं रखी, गीत किसी के गाने को
हमने कलम उठा नहीं रखी, गीत किसी के गाने को॥
हम अपने मन के मालिक हैं
अपने दिल की करते हैं,
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हम अपने मन के मालिक हैं
अपने दिल की करते हैं,
न्यूज़ीलैंड एक परिचय
न्यूज़ीलैंड (New Zealand) या आओटियारोआ (Aotearoa - न्यूज़ीलैंड का माओरी नाम) दक्षिण प्रशान्त महासागर में आस्ट्रेलिया के 2000 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसका कुल ?...
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मुट्ठी भर रंग अम्बर में
मुट्ठी भर रंग अम्बर में किसने है दे मारा
आज तिरंगा दीखता है अम्बर मोहे सारा
आज ब्रज बन जाएगा नगर अपना सारा
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आज तिरंगा दीखता है अम्बर मोहे सारा
आज ब्रज बन जाएगा नगर अपना सारा
लेखक
जेबकतरे ने उसकी जेब काटी तो लगा था कि काफी माल हाथ लगा है, भारी जान पड़ती थी। देखा तो सब के सब काग़ज़ निकले। काग़ज़ों पर नजर डाली तो तीन कविताएँ, एक कहानी और ...
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पागल
शहर में सब जानते थे कि वो पागल है। जब-तब भाषण देने लगता, किसी पुलिस वाले को देख लेता तो कहने लगता, 'ये ख़ाकी वर्दी में लुटेरे हैं। ये रक्षक नहीं भक्षक हैं। गर...
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चौबीस घंटे की कथा
[ न्यूजीलैंड श्रम दिवस की ऐतिहासिक कथा ]
बात 1839 के अंतिम महीनों की है। एक समुद्री जहाज इंग्लैंड से न्यूजीलैंड के लिए रवाना हुआ।
इसी जहाज में सेम्युल ड?...
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बात 1839 के अंतिम महीनों की है। एक समुद्री जहाज इंग्लैंड से न्यूजीलैंड के लिए रवाना हुआ।
इसी जहाज में सेम्युल ड?...
पारस पत्थर
'एक बहुत गरीब आदमी था। अचानक उसे कहीं से पारस-पत्थर मिल गया। बस फिर क्या था! वह किसी भी लोहे की वस्तु को छूकर सोना बना देता। देखते ही देखते वह बहुत धनवान बन ग...
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विडम्बना | लघु-कथा
मेरे एक मित्र को जब भी अवसर मिलता है अँग्रेज़ी भाषा व अँग्रेज़ी बोलने वालों को आड़े हाथों लेना नहीं भूलते ।
एक दिन कहने लगे, "यार, तुम अपनी राइटिंग (लेखन) ...
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एक दिन कहने लगे, "यार, तुम अपनी राइटिंग (लेखन) ...
प्रोफेसर ब्रिज लाल
प्रोफेसर ब्रिज लाल प्रसिद्ध इंडो-फीजियन इतिहासकार थे। आप लंबे समय से निर्वासन में थे और वर्तमान में ब्रिस्बेन, ऑस्ट्रेलिया के निवासी थे।
प्रोफेसर ब्रि...
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प्रोफेसर ब्रि...
कलयुग | मुक्तक
कलयुग में पाई है बस यही शिक्षा
हर बात पर मांगें हैं अग्नि-परीक्षा
बुद्ध भी अगर आज उतरें धरा पर
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हर बात पर मांगें हैं अग्नि-परीक्षा
बुद्ध भी अगर आज उतरें धरा पर
कंगारू के पेट की थैली
बहुत पुरानी बात है। उस समय कंगारू के पेट पर थैली नहीं होती थी। विज्ञान इस बारे में जो भी कहे लेकिन इस बारे में ऑस्ट्रेलिया में एक रोचक लोक-कथा है। बहुत पहल?...
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हिंदी पर दोहे
बाहर से तो पीटते, सब हिंदी का ढोल।
अंतस में रखते नहीं, इसका कोई मोल॥
एक बरस में आ गई, हमको हिंदी याद।
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अंतस में रखते नहीं, इसका कोई मोल॥
एक बरस में आ गई, हमको हिंदी याद।
वो था सुभाष, वो था सुभाष
वो भी तो ख़ुश रह सकता था
महलों और चौबारों में।
उसको लेकिन क्या लेना था,
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महलों और चौबारों में।
उसको लेकिन क्या लेना था,
तेरी मरज़ी में आए जो
तेरी मरज़ी में आए जो, वही तो बात होती है
कहीं पर दिन निकलता है, कहीं पर रात होती है
कहीं सूखा पड़ा भारी, कहीं बरसात होती है
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कहीं पर दिन निकलता है, कहीं पर रात होती है
कहीं सूखा पड़ा भारी, कहीं बरसात होती है
ऐसे थे रहीम
रहीम दान देते समय आँख उठाकर ऊपर नहीं देखते थे। याचक के रूप में आए लोगों को बिना देखे, वे दान देते थे। अकबर के दरबारी कवियों में महाकवि गंग प्रमुख थे। रहीम क...
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न्यूज़ीलैंड में हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी
लगभग 50 लाख की जनसंख्या वाले न्यूज़ीलैंड में अँग्रेज़ी और माओरी न्यूज़ीलैंड की आधिकारिक भाषाएं है। यहाँ सामान्यतः अँग्रेज़ी का उपयोग किया जाता है।
यद्?...
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यद्?...
7 दिसंबर | इतिहास के आईने में
7 दिसंबर | 7 December
इतिहास के गर्भ में प्रत्येक दिन से संबंधित अनेक कहानी, किस्से और प्रसंग छिपे हैं। आइए, जाने क्या हुआ था 7 दिसंबर को!
7 दिसंबर 1825 - भाँप से चलने ?...
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इतिहास के गर्भ में प्रत्येक दिन से संबंधित अनेक कहानी, किस्से और प्रसंग छिपे हैं। आइए, जाने क्या हुआ था 7 दिसंबर को!
7 दिसंबर 1825 - भाँप से चलने ?...
बालेश्वर अग्रवाल : यादों के झरोखों से
यादों के झरोखों से
स्व. बालेश्वर अग्रवाल जी ने विश्व भर में प्रवासियों एवं हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए ऐतिहासिक कार्य किया है। विश्व भर में उनके प्रति ?...
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स्व. बालेश्वर अग्रवाल जी ने विश्व भर में प्रवासियों एवं हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए ऐतिहासिक कार्य किया है। विश्व भर में उनके प्रति ?...