भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

श्रमिक हाइकु

श्रमिक हाइकु

ये मज़दूर
कितने मजबूर
घर से दूर!

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करता श्रम
आएंगे अच्छे दिन
पाले है भ्रम!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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