देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

श्रमिक हाइकु

ये मज़दूर
कितने मजबूर
घर से दूर!

#

करता श्रम
आएंगे अच्छे दिन
पाले है भ्रम!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।