भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

कलयुग | मुक्तक

कलयुग | मुक्तक | Hindi Muktak by Rohit Kumar Happy

कलयुग में पाई है बस यही शिक्षा
हर बात पर मांगें हैं अग्नि-परीक्षा
बुद्ध भी अगर आज उतरें धरा पर
मांगे ना देगा उन्हें कोई भिक्षा।

-रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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