अब्बास रज़ा अल्वी | ऑस्ट्रेलिया साहित्य Hindi Literature Collections
कुल रचनाएँ: 4
छोटी सी बिगड़ी बात को
छोटी सी बिगड़ी बात को सुलझा रहे हैं लोग
यह और बात है के यूँ उलझा रहे हैं लोग
चर्चा तुम्हारा बज़्म में ग़ैरों के इर्द गिर्द
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यह और बात है के यूँ उलझा रहे हैं लोग
चर्चा तुम्हारा बज़्म में ग़ैरों के इर्द गिर्द
रंगीन पतंगें
अच्छी लगती थी वो सब रंगीन पतंगे
काली नीली पीली भूरी लाल पतंगे
कुछ सजी हुई सी मेलों में
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काली नीली पीली भूरी लाल पतंगे
कुछ सजी हुई सी मेलों में
विडम्बना | अब्बास रज़ा अल्वी की कविता
आज मैं पीटी नहीं मार डाली गयी हूँ
मैं पीटी गयी तुम देखते रहे
ख़बरों की सुर्ख़ियों में पढ़ते रहे
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मैं पीटी गयी तुम देखते रहे
ख़बरों की सुर्ख़ियों में पढ़ते रहे
मेरे देश का एक बूढ़ा कवि
फटे हुए लिबास में क़तार में खड़ा हुआ
उम्र के झुकाओ में आस से जुड़ा हुआ
किताब हाथ में लिये भीड़ से भिड़ा हुआ
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उम्र के झुकाओ में आस से जुड़ा हुआ
किताब हाथ में लिये भीड़ से भिड़ा हुआ