अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

छोटी सी बिगड़ी बात को

छोटी सी बिगड़ी बात को | Hindi poem by Abbas Raza Alvi

छोटी सी बिगड़ी बात को सुलझा रहे हैं लोग
यह और बात है के यूँ उलझा रहे हैं लोग

चर्चा तुम्हारा बज़्म में ग़ैरों के इर्द गिर्द
कुछ इस तरह से दिल मेरा बहला रहे हैं लोग

अरमाँ नये साहिल नये सब सिलसिले नये
उजड़े हुए दायर में दिखला रहे हैं लोग

कहते हैं कभी इश्क़ था अब रख रखाओ है
फिर आज क्यों यूँ देखकर शर्मा रहे है लोग

हमने खुद अपने जुर्म का इक़रार कर लिया
अब क्यों "रज़ा" से इस क़दर कतरा रहे हैं लोग

-अब्बास रज़ा अल्वी

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