सड़क के बीच एक कील पड़ी है। तेजी के साथ एक युवक साईकिल पर आया। उसकी निगाह कील पर पड़ी। झटपट हैंडल घुमा वह अपनी मुस्तैदी पर मुस्कराया कि उसने साईकल का टायर पंचर होने से बचा लिया है।
घिसे हुए जूते में कोई चीज चुभी है। बूढ़े ने गर्दन झुकाकर नीचे की ओर देखा। एक कील है। मुंह बिचकाकर वह आगे निकल गया।
फिर आगे पीछे दौड़ते हुए लड़के आये। आगे वाले लड़के ने उछलकर अपने पांव को छलनी होने से बचा लिया है। दूसरे ने पूछा, "उछले क्यों?"
पहले बाले ने कील की ओर इशारा कर दिया। साथ ही जख्मी होने से बच जाने की खुशी में किलकारी भर दी। दूसरा भी उसकी होशियारी पर खुश हो गया। कील अब भी सड़क पर पड़ी है।
-पृथ्वीराज अरोड़ा
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